पायल की जगह बेटी के पैर में बेड़ी बांधने पर मजबूर हैं माता और िपता
घाघरा(गुमला) : बेटी के पैर में पायल की जगह लोहे की बेड़ी बंधी हुई है. बात हो रही है घाघरा प्रखंड के गम्हरिया गांव निवासी बिरसा मुंडा व सुकवारी मुंडाइन की बेटी सुंदैर कुमारी की. वृद्ध दंपती अपनी बेटी सुंदैर को दो माह से अपने ही घर में कैद कर रखने को विवश हैं. दंपती […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
घाघरा(गुमला) : बेटी के पैर में पायल की जगह लोहे की बेड़ी बंधी हुई है. बात हो रही है घाघरा प्रखंड के गम्हरिया गांव निवासी बिरसा मुंडा व सुकवारी मुंडाइन की बेटी सुंदैर कुमारी की. वृद्ध दंपती अपनी बेटी सुंदैर को दो माह से अपने ही घर में कैद कर रखने को विवश हैं. दंपती ने बताया कि हम दोनों की उम्र 70 वर्ष पार हो चुकी है.
हम उसकी देखरेख नहीं कर सकते हैं. इस कारण उसे सिकड़ में बांध कर रखते हैं. पिता बिरसा ने बताया कि उसकी बेटी सुंदैर की शादी चार वर्ष पूर्व चेचेपाट गांव के बिरसु मुंडा से हुई थी. शादी के बाद वह अपने ससुराल चली गयी. ससुराल जाते ही सुंदैर विक्षिप्त हो गयी. मायका आने के बाद सुंदैर दोबारा अपने ससुराल नहीं गयी. उसका पति उसे लेने के लिए आया था, परंतु विक्षिप्त होने के कारण उसे नहीं ले गया.
धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति और खराब होने लगी. तीन वर्ष पूर्व कांके, रांची ले जाकर भर्ती कराया. कांके में कुछ दिन रखने के बाद चिकित्सकों ने उसे छुट्टी दे दी. घर लाने के बाद उसकी स्थिति और भी खराब हो गयी. बिरसा ने बताया कि मेरा एक पुत्र जन्म से ही मंदबुद्धि का है, जो गांव में दिन-रात घूमता रहता है. बाकी सभी बेटे बाहर काम करते हैं. पूरा घर का जिम्मा बिरसा के ऊपर था, पर बिरसा अब वृद्ध हो गया है.
कमाने की स्थित में नहीं है. बिरसा को चिंता होने पर विक्षिप्त बेटी सुंदैर को बेड़ी में बांध कर रखा है. इस संबंध में ग्रामीण पवन साहू ने बताया कि सुंदैर के इलाज के लिए बदरी पंचायत में लगे जनता दरबार में शिकायत की गयी थी. सीएम जनसंवाद में भी शिकायत की गयी है. इसके बाद भी अभी तक कुछ कार्रवाई नहीं हुई. पिता बिरसा मुंडा व माता सुकवारी मुंडाइन को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलती है. सरकारी लाभ के नाम पर सिर्फ राशन मिलता है.