जिले के 80 सरकारी और सार्वजनिक तालाबों का किया जायेगा जीर्णोद्धार
गुमला : इस वर्ष बरसात के मौसम में बारिश के पानी को संग्रह करने के लिए जिले के 80 सरकारी और सार्वजनिक तालाबों का जीर्णोद्धार होगा. जीर्णोद्धार का यह काम जिला भूमि संरक्षण विभाग गुमला द्वारा पानी पंचायत समिति के माध्यम से कराया जायेगा. इसके लिए सरकार द्वारा जिला भूमि संरक्षण विभाग को विशेष निर्देश […]
गुमला : इस वर्ष बरसात के मौसम में बारिश के पानी को संग्रह करने के लिए जिले के 80 सरकारी और सार्वजनिक तालाबों का जीर्णोद्धार होगा. जीर्णोद्धार का यह काम जिला भूमि संरक्षण विभाग गुमला द्वारा पानी पंचायत समिति के माध्यम से कराया जायेगा. इसके लिए सरकार द्वारा जिला भूमि संरक्षण विभाग को विशेष निर्देश प्राप्त हुआ है. जिले में 24 मई से सात जून तक जल संचयन दिवस मनाया जायेगा. जल संचयन दिवस के मद्देनजर तालाबों के जीर्णोद्धार का काम होगा.
वहीं निर्देश प्राप्त होने के बाद विभाग ने जीर्णोद्धार किये जाने वाले सरकारी और सार्वजनिक तालाबों की सूची भी बना ली है, जिसमें 40 सरकारी और 40 सार्वजनिक तालाब शामिल हैं. योजना में एक से पांच एकड़ के बीच के तालाबों का चयन किया गया है. तालाबों के जीर्णोद्धार की यह योजना जल संचयन योजना के तहत बनायी गयी है. सात जून तक मिट्टी तक का काम पूरा करना है. तालाबों के जीर्णोद्धार का काम जेसीबी मशीन होगा, ताकि निर्धारित तिथि तक योजना को पूर्ण किया जा सके.
योजना में एक से पांच एकड़ के बीच के तालाबों का चयन किया गया है
तालाब के जीर्णोद्धार में आठ – 10 लाख होंगे खर्च
जीर्णोद्धार के लिए चयनित 80 तालाबों के जीर्णोद्धार में लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. एक तालाब के जीर्णोद्धार पर आठ से 10 लाख रुपये खर्च होगा. जिस तालाब की गहराई कम है, उस तालाब को जेसीबी मशीन के माध्यम से गहरा किया जायेगा. वहीं तालाब के निकलने वाली मिट्टी से तालाब का मेढ़ बनाया जायेगा. तालाब में प्रत्येक तीन फीट की दूरी पर एक स्टेपिंग रहेगा.
80 तालाबों से एक हजार हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
जीर्णोद्धार के बाद तालाब में पानी संचय होने से किसान लाभान्वित होंगे. एक तालाब के पानी से समीप के आठ से 10 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी. इसी प्रकार 80 तालाबों से 800 से एक हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी.
विभाग की भावी योजना
तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना के पीछे जिले के किसानों को लाभान्वित करना है. तालाबों के जीर्णोद्धार की यह योजना जल संचयन के उद्देश्य से बनायी गयी है, ताकि इस वर्ष बरसात के मौसम में बारिश का पानी नदी अथवा नालों के माध्यम से निकले नहीं, बल्कि तालाब में जमा होकर रहे. तालाब में पानी संचय रहेगा, तो कृषक उक्त जमा पानी का सिंचाई में उपयोग कर पायेंगे. साथ ही प्रत्येक वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की जो किल्लत होती है, वह किल्लत भी दूर हो. तालाब में पानी जमा रहेगा, तो समीप के क्षेत्रों के चापानलों और कूपों का भी जलस्तर अच्छा रहेगा.
तालाबों के जीर्णोद्धार के फायदे
गुमला कृषि प्रधान जिला है. यहां के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है. जिले की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य पर आश्रित है. परंतु प्राय: ऐसा होता है कि सिंचाई सुविधा के अभाव में प्रत्येक वर्ष जिले के सैकड़ों कृषक खेतीबारी नहीं कर पाते हैं, परंतु अब ऐसा नहीं होगा. तालाबों के जीर्णोद्धार के बाद बारिश का पानी तालाब में संचय होगा, जिसका सीधा लाभ कृषकों को मिलेगा.
तालाबों में मत्स्य पालन की भी है संभावना
तालाबों के जीर्णोद्धार के बाद जहां कृषक तालाब में संचय पानी का उपयोग खेतीबारी में कर सकते हैं, वहीं तालाब में मत्स्य पालन भी कर सकेंगे. फिलहाल तालाबों में मत्स्य पालन संबंधित योजना नहीं है, परंतु गुमला जिला मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी अग्रणी है. जिले के कई लोग मत्स्य पालन से भी जुड़े हुए हैं. मत्स्य पालन के माध्यम से ही जिले के कई लोग अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में लगे हुए हैं.
सरकार के निर्देश के बाद जीर्णोद्धार किये जाने वाले तालाबों का चयन कर लिया गया है. कई तालाबों में काम भी शुरू हो गया है. सात जून तक मिट्टी तक का काम पूरा कर लेना है. जीर्णोद्धार के बाद तालाब में संचय जल से जिले के कृषक लाभान्वित होंगे.
राकेश कुमार कनौजिया
जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, गुमला