प्रतिनिधि, गुमला गुमला जिले में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकथाम के लिए मनाया गया सतर्कता दिवस एक सराहनीय पहल है. लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान ने जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारी, चाइल्ड लाइन और आशा यूनिटों के सहयोग से यह अभियान चलाया. संस्थान के सचिव चंद्रपति यादव ने स्पष्ट कहा कि शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को स्वीकार नहीं किया जा सकता. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत नाबालिग बच्चों की शादी कराना या उसमें किसी भी रूप में शामिल होना दंडनीय अपराध है. इसमें दो साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है. बाराती, लड़की के पक्ष के लोग, कैटरर, डेकोरेटर, हलवाई, बैंड बाजा वाले, मैरेज हॉल मालिक और विवाह संपन्न कराने वाले पंडित-मौलवी तक को दोषी माना जा सकता है. जागरूकता अभियानों से हालात बदले हैं. पहले लोगों को कानून की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वे प्रशासन को सूचना देने लगे हैं. प्रशासन भी तुरंत कार्रवाई कर बाल विवाह रोक रहा है. अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर बाल विवाहों की संख्या में कमी आई है, जो एक उल्लेखनीय बदलाव है.
अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए मनाया सतर्कता दिवस
अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए मनाया सतर्कता दिवस
