गड़बड़ी. मुर्गी शेड बनाया नहीं और एनजीओ ने रुपये की निकासी कर ली
127 मुर्गी शेड के लिए 99 लाख की निकासी की, खर्च 50 लाख के करीब हुआ
गुमला : गुमला जिले में अभिनव विकास सेवा समिति, बरवाडीह लातेहार (एनजीओ) ने मुर्गी शेड निर्माण में 50 लाख रुपये से अधिक राशि का घोटाला किया है. आइटीडीए (मेसो विभाग) से रायडीह प्रखंड की सिलम पंचायत में मुर्गी पालन के लिए 127 मुर्गी शेड निर्माण की जिम्मेवारी एनजीओ को दी गयी थी. यह वर्ष 2011-2012 की योजना है. एनजीओ ने 127 में से 90 शेड बनाने का प्रतिवेदन विभाग को सौंपा है, लेकिन एनजीओ ने 127 शेड निर्माण की 99 लाख रुपये की राशि की निकासी कर ली है, जबकि 37 शेड बना ही नहीं है. वहीं जो 90 शेड बना है, वह भी आधा-अधूरा बना कर एनजीओ फरार हो गया.
एनजीओ ने शेड बनाने के लिए लाभुकों के घर के दरवाजे के पास सिर्फ निर्माण सामग्री गिरा दी. मिस्त्री व मजदूरी खर्च लाभुकों को नहीं दिया गया. अंत में लाभुकों ने अपना पैसा खर्च कर मुर्गी शेड पूरा किया है. एनजीओ ने जो सामग्री आपूर्ति की है, उसकी लागत 38-40 हजार रुपये है, जबकि आइटीडीए विभाग के स्टीमेट के अनुसार, एक शेड 80 हजार रुपये की लागत से बनाना था. ऐसे में एनजीओ ने प्रत्येक शेड में 40 हजार रुपये की गड़बड़ी की है.
80 हजार रुपये के शेड में 40 हजार रुपये की सामग्री आपूर्ति की गयी
मेसो विभाग से मुर्गी शेड बनना था. एनजीओ द्वारा सिर्फ निर्माण सामग्री घर के दरवाजे के पास गिरा दी गयी. मिस्त्री व मजदूरी खर्च नहीं दिया. मजबूरन प्रत्येक लाभुक को 20-25 हजार रुपये अपने घर से खर्च कर शेड बनवाना पड़ा.
रोशनी लकड़ा, अध्यक्ष, महिला समूह, खटखोर
40 हजार की सामग्री की आपूर्ति की
एनजीओ द्वारा एक मुर्गी शेड बनाने के लिए दो हजार ईंट, आधा ट्रैक्टर टुकड़ा ईंट, 15 बोरा सीमेंट, दो ट्रैक्टर बालू, 22 पीस एसबेस्टस व लोहे का चार पीस एंगल लाभुकों को दिया गया है. इन सभी सामग्री की कीमत करीब 38 से 40 हजार रुपये है, जबकि शेड बनाने की लागत 80 हजार रुपये है. आइटीडीए विभाग के अनुसार एनजीओ को 127 मुर्गी शेड की राशि शेड बनने से पहले भुगतान कर दी गयी थी. इधर, चार सालों से एनजीओ फरार है. विभाग द्वारा बार-बार नोटिस भेजा जा रहा है, परंतु एनजीओ हाजिर नहीं हो रहा है.
जाली दस्तावेज से लाखों की निकासी
एक जांच एजेंसी के अनुसार, अभिनव विकास सेवा समिति, बरवाडीह लातेहार जो पूर्व में पारसनाथ अग्रवाल के नाम पर था, जिनकी मृत्यु वर्ष 2014 में हो गयी. उसके बाद उक्त एनजीओ को उनके पुत्र मनोज कुमार अग्रवाल एवं अन्य लोग मिल कर चला रहे हैं. एनजीओ द्वारा मुर्गीपालन, जल संचयन व वृक्षारोपण के अलावा कई कामों के लिए सरकार से पैसा लिया गया है. एजेंसी के अनुसार, उक्त एनजीओ द्वारा जाली दस्तावेज तैयार कर पैसा निकासी की सूचना प्राप्त हुई है.
