गुमला : गुमला से 20 किमी दूर आंजन गांव है. आज से 10 साल पहले तक इस क्षेत्र में उग्रवादियों का शासन चलता था. हर सप्ताह गोलियों की आवाज सुनायी पड़ती थी. खून की होली खेली जाती थी. कई परिवार उग्रवादियों के कारण गांव छोड़ कर गुमला शहर में रह रहे हैं.
लेकिन पुलिस की दबिश के बाद इस क्षेत्र से उग्रवाद खत्म हो रहा है. उग्रवाद खत्म हो रहा है तो अब आंजन गांव के लोग विकास के लिए छटपटा रहे हैं. विकास की बात करें तो टोटो से आंजन तक पक्की सड़क बनी है. इसके अलावा अगर इस क्षेत्र में विकास देंखे तो आज भी लोग उपेक्षा के शिकार हैं. जबकि इस गांव में राज्यपाल, मुख्य सचिव सहित कई बड़े अधिकारियों का दौरा हो चुका है. गांव में जलमीनार है जो 15 सालों से बेकार पड़ा हुआ है. गरमी के दिनों में लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है.
पानी नहीं मिलने पर लोग मंदिर के बगल से नदी बहती है, उसी नदी के पानी को रोक कर चुआं बना कर लोग पानी पीते हैं. गांव के 56 वर्षीय राजनंदन ठाकुर हैं. उनकी बात सुनें तो सरकार व प्रशासन का ध्यान इस गांव की ओर नहीं है. लोग स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे हैं. लेकिन पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है. 15 से 16 चापानल है. लेकिन गरमी के दिनों में सभी जवाब दे देता है. नदी का पानी पीते हैं. यहां तक कि स्कूली बच्चों को भी परेशानी होती है.
