नहर में स्लैब चार इंच की जगह तीन इंच बनाया जा रहा है, नाराज ग्रामीणों ने, कतरी जलाशय मरम्मत कार्य बंद कराया
घाघरा(गुमला): घाघरा प्रखंड में एसएपीइसी कंट्रक्शन कंपनी द्वारा कतरी जलाशय योजना (नहर) में मरम्मत का काम कराया जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य घटिया हाे रहा है. नहर में स्लैब चार इंच मोटा ढाला जाना है, लेकिन दो से तीन इंच ही स्लैब ढाला जा रहा है, जिससे बरसात में स्लैब […]
घाघरा(गुमला): घाघरा प्रखंड में एसएपीइसी कंट्रक्शन कंपनी द्वारा कतरी जलाशय योजना (नहर) में मरम्मत का काम कराया जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य घटिया हाे रहा है. नहर में स्लैब चार इंच मोटा ढाला जाना है, लेकिन दो से तीन इंच ही स्लैब ढाला जा रहा है, जिससे बरसात में स्लैब बह सकता है.
ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य बेहतर ढंग से कराये जाने की मांग करते हुए नहर मरम्मत का काम बंद करा दिया है. ग्रामीणों ने कहा कि नहर हमारी सुविधा के लिए है, ताकि ग्रामीण नहर के पानी को खेतों तक ले जा सके. लेकिन यहां घटिया मरम्मत का काम हो रहा है. ग्रामीणों के विरोध के बाद कंपनी ने काम बंद कर दिया है.
ज्ञात हो कि कतरी जलाशय योजना में (नहर मरम्मत) 100 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कार्य चल रहा है. लेकिन शुरू से ही काम घटिया होने का आरोप लग रहा है. जानकारी के अनुसार, बेलागढ़ा केश्वर बांध के समीप बेलागड़ा पंचायत के मुखिया संजय उरांव व पंचायत समिति सदस्य पलक सिंह के अलावा कई ग्रामीणों ने जाकर निरीक्षण किया. नहर का पक्कीकरण किया जा रहा है, जिसमें चार इंच का स्लैब ढाला जाना है, परंतु दो-तीन इंच तक ही ढाला जा रहा है, जिसके बाद ग्रामीणों ने काम बंद कराया है.
ढलाई तोड़ दुबारा निर्माण कराने का निर्देश
पंचायत समिति सदस्य पलक सिंह ने काम करा रहे सुपरवाइजर को जहां पर कम ढलाई की गयी है, उसे तोड़ कर दोबारा निर्माण कार्य करने का निर्देश दिया है. अगर ऐसा नहीं किया गया, तो ग्रामीण भूख हड़ताल करेंगे. पलक सिंह ने बताया कि वर्षों बाद इस जलाशय की मरम्मत करायी जा रही है. कंट्रक्शन कंपनी जैसे-तैसे काम करके पैसा कमा कर इस इलाके से चली जाना चाहती है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मौके पर राजदीप यादव, बिरसमुनी देवी, शांति देवी, सुशांति कुमारी, मंगरो देवी, रवि भगत व राजू भगत सहित कई लोग मौजूद थे.
इंजीनियर बिना बताये चल दिये
कंपनी के जूनियर इंजीनियर कृष्णा से पूछे जाने पर कि चार इंच की जगह तीन इंच ढलाई क्यों हो रही है, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए वहां से चल दिये. वहां काम देख रहे अन्य लोगों से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं हुआ. बस सभी यही कह रहे थे कि काम में सुधार हो जायेगा.
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर की सुनिए
कंट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर इब्राहिम से फोन पर बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है, सब जगह ठीक काम चल रहा है. उन्होंने पंचायत के जनप्रतिनिधि व ग्रामीणों की जांच होने की बात से इनकार किया और कहा कि कोई जांच नहीं हुई है. निर्माण कार्य को भी नहीं रोका गया है.
2000 एकड़ खेत को पानी मिलेगा
कतरी जलाशय से दो हजार एकड़ से अधिक जमीन सिचिंत होती है. लंबे वर्षों तक डैम की मरम्मत नहीं हुई थी. कई जगह नहर टूट कर बरबाद हो गया था, तब जाकर ग्रामीण संगठित हुए और आंदोलन किया. वर्षों के आंदोलन के बाद 100 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कार्य शुरू हुआ.
विरोध करने पर धमकी दी जाती है
ग्रामीणों के अनुसार, घटिया काम का विरोध कर रहे ग्रामीण व जनप्रतिनिधि जब आवाज उठाते हैं, तो कंपनी के कुछ दबंग किस्म लोग धमकी देने के लिए उनके घर पहुंच जाते हैं. इसके पूर्व भी कई बार हमलोगों ने विरोध किया, लेकिन कुछ स्थानीय दबंग, जो कंपनी द्वारा पाले गये हैं, आकर धमकाते हैं. कहते हैं कि विरोध करोगे, तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.