स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं बनीं प्रेरणा स्रोत, स्वरोजगार से बनीं आत्मनिर्भर

रामचंद्रपुर में महिला संवाद का आयोजन, महिलाओं ने खुलकर रखे अपने विचार

महागामा प्रखंड के जियाजोरी पंचायत अंतर्गत रामचंद्रपुर गांव में महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर जेएसएलपीएस से जुड़ी रामचंद्रपुर आजीविका महिला ग्राम संगठन की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभायी. कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्थिति को मजबूत किया गया विषय पर संवाद हुआ, जिसमें महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किये. महिलाओं ने बताया कि पहले वे घर की चारदीवारी में सिमटी रहती थीं, लेकिन जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद आज वे आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रही हैं. समूह से मिले अल्प-ब्याज ऋण के माध्यम से वे अब पशुपालन, किराना दुकान, बैंकिंग सेवा और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास का विकास हुआ है. वे अब बैंक जाकर कार्य कर रही हैं, सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात रख रही हैं. वहीं घरेलू आय में अहम भूमिका निभा रही हैं. पहले जो महिलाएं छोटे-छोटे खर्चों के लिए पति या परिवार पर निर्भर थीं, वे आज आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन चुकी हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं. संवाद में यह भी बताया गया कि जेएसएलपीएस से जुड़ने के बाद महिलाओं की केवल आमदनी ही नहीं बढ़ी, बल्कि उनकी सामाजिक पहचान भी बनी है. वे अब केवल परिवार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गांव के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता शोभा देवी ने की, जबकि संचालन गुंजन कुमार ने किया.

महिलाओं ने रखी बात

महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी काबिलियत का प्रदर्शन कर रही हैं. यह और बेहतर हो सकता है, यदि उन्हें आवश्यक संसाधन व अवसर उपलब्ध कराए जायें.

-सुशीला देवी

जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो परिवार और समाज दोनों को लाभ होता है. आज के समय में महिलाओं का आत्मनिर्भर होना नितांत आवश्यक हो गया है.

-तरेसा सोरेन

सरकार हर किसी को नौकरी नहीं दे सकती, लेकिन नीति बनाकर महिलाओं के हुनर को आजीविका से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं.

-रेणु देवी

जेएसएलपीएस से मुझे पहचान और मंच मिली है. अब मैं स्वरोजगार कर अपने परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हूं और आत्मनिर्भर रूप में स्थापित हो रही हूं.

-गीता देवी

महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है. वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. यह बदलाव केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है.

-नारंगी कुमारी

पहले ग्रामीण महिलाएं दूसरों पर निर्भर थीं, अब आत्मनिर्भर बनकर परिवार और समाज की जिम्मेदारी निभा रही हैं. इससे हमारी सोच और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है.

-शोभा देवी

अब हमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. मैं स्वरोजगार कर अपने परिवार की जीविका चला रही हूं और गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हूं.

-सोहिता देवी

स्वरोजगार से न केवल परिवार को सहयोग दे रही हूं, बल्कि गांव के विकास में भी सक्रिय योगदान कर रही हूं. सखी मंडल से जुड़कर आर्थिक स्थिति में सुधार आया है.

-सुमित्रा देवी

महिलाओं ने कई बार खुद को बेहतर साबित किया है और अब घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ आर्थिक सहयोग में भी अहम भूमिका निभा रही हैं.

-पार्वती देवी

ग्रुप से जुड़ने से पहले आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. गांव की महिलाओं ने प्रेरित किया और जुड़ने के बाद मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव आया, यह सही निर्णय साबित हुआ.

-तरीणा देवीB

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Author: SANJEET KUMAR

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