एक सदी से पुलिया की आस, बरसात में रास्ता बना आफत; ग्रामीणों ने खुद बनाया अस्थायी रास्ता

झारखंड के हनवारा में पुलिया न होने से परेशान ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से खुद बनाया अस्थायी रास्ता. प्रशासन से स्थायी पुलिया निर्माण की मांग की.

हनवारा में स्थायी पुलिया नहीं बनने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी. 20 से 30 घरों के लोगों ने आपसी सहयोग से अस्थायी रास्ता बनाया, प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की.

हनवारा : एक छोटी पुलिया का इंतजार आखिर कितना लंबा हो सकता है. महागामा प्रखंड की लोगांय पंचायत के कस्बा गांव के ग्रामीणों की कहानी इसका जवाब देती है. ग्रामीणों का दावा है कि वे करीब एक सदी से इस रास्ते पर पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज भी बरसात आते ही उनका रास्ता आफत बन जाता है. हालात ऐसे बने कि लंबे इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद ही आपसी सहयोग से पुलिया नुमा अस्थायी रास्ता तैयार कर लिया.

पुलिया नहीं बनने से बरसात में बिगड़ जाती है स्थिति

कस्बा गांव के ग्रामीणों के अनुसार इस रास्ते से गांव के अधिकांश लोग बहियार की ओर आते-जाते हैं. सामान्य दिनों में भी रास्ते की स्थिति अच्छी नहीं रहती, लेकिन बारिश होने और पानी जमा होने के बाद समस्या कई गुना बढ़ जाती है.

जलभराव के कारण रास्ते से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है. दोपहिया और अन्य वाहनों की आवाजाही लगभग असंभव हो जाती है. इससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ बहियार जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है.

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पुलिया निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया. बरसात के दिनों में यह समस्या सबसे अधिक गंभीर रूप ले लेती है.

20 से 30 घरों के ग्रामीणों ने मिलकर तैयार किया अस्थायी रास्ता

लंबे समय तक पुलिया निर्माण का इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने अपनी परेशानी का अस्थायी समाधान खुद निकालने का फैसला किया. करीब 20 से 30 घरों के लोगों ने आपसी सहयोग से पुलिया नुमा एक छोटा अस्थायी रास्ता तैयार किया.

फिलहाल इसी रास्ते के सहारे लोग किसी तरह पैदल आवाजाही कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में आवागमन जारी रखने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.

ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है. खराब रास्ते और पानी जमा होने की स्थिति में सुरक्षित तरीके से निकलना चुनौती बन जाता है.

दैनिक जरूरतों के लिए लोगों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है. ऐसे में बारिश के दिनों में परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है. अस्थायी रास्ता कुछ हद तक राहत दे रहा है, लेकिन ग्रामीण इसे पर्याप्त समाधान नहीं मानते.

आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी मुश्किल

स्थायी पुलिया नहीं होने का असर केवल सामान्य आवाजाही तक सीमित नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि किसी आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी कठिन हो जाता है.

बारिश के दौरान रास्ता खराब होने से वाहन का पहुंचना मुश्किल हो सकता है. ऐसे हालात में समय पर मुख्य सड़क तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि एक मजबूत पुलिया बनने से इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है.

मुखिया से मंत्री स्तर तक उठा चुके हैं पुलिया निर्माण का मुद्दा

ग्रामीणों के अनुसार पुलिया निर्माण की मांग को लेकर पंचायत के मुखिया से लेकर मंत्री स्तर तक जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है. कई बार इस मुद्दे को उठाने के बावजूद अब तक यहां स्थायी पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है.

लंबे समय से समाधान नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों में निराशा है. उनका कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर पुलिया निर्माण का काम शुरू होते देखना चाहते हैं.

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मामले पर ध्यान देने की मांग की है. उनका कहना है कि इलाके की जरूरत को देखते हुए जल्द सर्वे कराकर मजबूत पुलिया का निर्माण कराया जाना चाहिए.

स्थायी पुलिया बनने से सालभर सुगम हो सकता है आवागमन

ग्रामीणों का मानना है कि यहां स्थायी और मजबूत पुलिया बनने से वर्षभर सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा. बरसात के दौरान जलभराव और रास्ता बाधित होने की समस्या से राहत मिलेगी.

इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही आसान होगी. और आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में कम परेशानी होगी.

ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की गुहार लगायी है. मौके पर मो. इसराईल, मो. अजीम, छेदी, वार्ड सदस्य सलमान खान सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे.


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By Prabhat khabar news desk

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