गोड्डा नगर परिषद चुनाव में सुशील रमानी की ऐतिहासिक जीत अब शहर में चर्चा का विषय बन गयी है. इस जीत के पीछे जहां सुशील रमानी की व्यक्तिगत लोकप्रियता और मेहनत का योगदान रहा. वहीं उनके चुनावी अभियान में सुमन कुमार उर्फ सुमन दास का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. सुमन दास ने पर्दे के पीछे रहते हुए चुनावी रणनीतियों को मूर्त रूप दिया और चुनावी जीत में गैंम चेंजर की भूमिका निभायी. गोड्डा नगर निकाय क्षेत्र को ओबीसी वन के तहत रिजर्व करने के बाद सुमन दास ने तय किया कि सुशील रमानी के पुत्र मुकेश रमानी को चुनावी उम्मीदवार के रूप में सामने लाया जाये. मुकेश का नाम पहले ही चर्चा में था और इस फैसले ने शहर में उनकी पहचान बनायी. हालांकि, मुकेश रमानी के दो बच्चों के कारण उम्मीदवार बनने की अर्हता पूरी नहीं हो पायी, जिसके बाद सुशील रमानी को उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया. सुमन कुमार ने चुनाव के दौरान शहर के विभिन्न वोट पॉकेट्स और अन्य उम्मीदवारों की कमजोर स्थिति को सही समय पर पहचाना और उस पर काम किया. उन्होंने चुनावी प्रचार के साथ-साथ कागजी कार्य को भी पूरी तरह से संभाला. इसके साथ ही, उन्होंने उन व्यक्तियों से भी समर्थन हासिल किया, जिन्होंने पिछली बार जितेंद्र कुमार को अंदर से मदद दी थी. सुमन कुमार ने इस पूरे चुनावी अभियान में पर्दे के पीछे रहकर अपनी रणनीतियों को लागू किया. उनका चुनावी मार्गदर्शन और उनकी कड़ी मेहनत ने ही सुशील रमानी की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया. यह साफ है कि सुमन कुमार के बिना इस चुनावी जीत की कहानी अधूरी रह सकती थी. अब गोड्डा शहर में सुमन कुमार के कार्य और उनकी राजनीतिक सूझबूझ की चर्चा जोरों पर है.
गोड्डा नगर परिषद चुनाव में सुशील रमानी की जीत में सुमन की रही अहम भूमिका
पर्दे के पीछे से खेली गैंम चेंजर की भूमिका
