ठाकुरगंगटी प्रखंड मुख्यालय से करीब दो हजार फीट की दूरी पर स्थित किसान भवन आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार है. कभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा का प्रमुख केंद्र रहा यह भवन अब जर्जर अवस्था में विकास की बाट जोह रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2000 के आसपास जब प्रखंड एवं अंचल स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त आवास उपलब्ध नहीं थे, तब किसान भवन ही उनके ठहरने का प्रमुख स्थान हुआ करता था. एक समय ऐसा था जब यहां दर्जनभर कर्मचारी और अधिकारी निवास कर अपने दायित्वों का निर्वहन करते थे. वर्तमान में भवन की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है और इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 15 से 20 वर्ष पूर्व इस भवन का अपना अलग महत्व था. प्रखंड में पदस्थापित होने वाले अधिकांश अधिकारी एवं कर्मचारी इसी भवन में ठहरते थे. समय के साथ रखरखाव के अभाव में भवन जीर्ण-शीर्ण हो गया है और धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि विशाल परिसर में स्थित यह भवन सभी आवश्यक सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया जा सकता है. यदि इसका पुनरुद्धार कराया जाए तो यह न केवल अधिकारियों के ठहरने की समस्या का समाधान करेगा, बल्कि प्रखंड मुख्यालय के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में क्षेत्र में ऐसे सरकारी भवनों का अभाव है, जिसके कारण कई अधिकारियों को ठहरने के लिए गोड्डा का सहारा लेना पड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि उपेक्षा के कारण भवन के दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामान भी गायब हो चुके हैं. संरक्षण के अभाव में भवन लगातार क्षतिग्रस्त होता जा रहा है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विधायक सह मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से किसान भवन के पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण की मांग की है. उनका कहना है कि यदि इस भवन को फिर से विकसित किया जाये तो यह क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित होगा और अपने पुराने गौरव को पुनः प्राप्त कर सकेगा.
सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव : बीडीओ
इस संबंध में बीडीओ विजय कुमार मंडल ने कहा कि किसान भवन के अस्तित्व को समाप्त नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि भवन के पुनर्निर्माण के लिए विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि स्वीकृति मिलने के बाद भवन का पुनर्निर्माण कराया जायेगा, जिससे किसान भवन की पहचान और उपयोगिता फिर से स्थापित हो सकेगी.
