महागामा में बारिश ने छोड़ा साथ, खेतों में पड़ी दरारें; धान बचाने के लिए कर्ज लेकर डीजल फूंक रहे किसान

मानसून की बेरुखी से किसान परेशान. जुलाई में राहत, अगस्त में सूखा. धान बचाने के लिए कर्ज लेकर सिंचाई, लागत बढ़ी. फसल पर मंडरा रहा खतरा. जानिए पूरी स्थिति.

हनवारा प्रतिनिधि. महागामा प्रखंड क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जुलाई में हुई अच्छी बारिश के बाद अगस्त में बारिश का सिलसिला थमने से खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है. धान समेत खरीफ फसलों पर संकट मंडराने लगा है. कई खेतों में दरारें दिखने लगी हैं और धान के पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

जुलाई में राहत, अगस्त में बारिश ने दिया धोखा

जुलाई में हुई अच्छी बारिश से किसानों को उम्मीद जगी थी कि इस बार धान की फसल बेहतर होगी. लेकिन अगस्त में बारिश की कमी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. खेतों में पानी की कमी होने से धान की फसल प्रभावित होने लगी है. समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है.

पंपसेट से फसल बचाने की जद्दोजहद

जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे पंपसेट के सहारे फसल बचाने में जुटे हैं. लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगे डीजल से सिंचाई करना मुश्किल साबित हो रहा है. फसल बचाने के लिए कई किसान कर्ज लेकर पटवन करने को मजबूर हैं. बढ़ती लागत ने पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है.

खेतों में दरार, धान पर मंडराया संकट

किसानों का कहना है कि खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर है. अगर समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा. खेतों में नमी की कमी के कारण कई जगह दरारें पड़ने लगी हैं. पिछले वर्ष भी कम उत्पादन के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था. इस बार भी हालात उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.

महागामा-मेहरमा में किसान बारिश के इंतजार में

गोड्डा जिले में बारिश का वितरण असमान रहा है. कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि महागामा, मेहरमा और हनवारा क्षेत्र के किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. कृषि विभाग के अनुसार धान की फसल के इस चरण में पानी की पर्याप्त उपलब्धता बेहद जरूरी है.

डीजल अनुदान और सिंचाई सुविधा की मांग

किसानों ने प्रशासन से डीजल अनुदान देने, वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था कराने और फसलों की नियमित निगरानी की मांग की है. किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो फसल को बचाया जा सकता है. बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है.


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By Prabhat khabar news desk

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