पोड़ैयाहाट प्रखंड में रविवार देर रात से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया. रविवार रात करीब 12 बजे शुरू हुई वर्षा सोमवार सुबह लगभग 10 बजे तक लगातार होती रही. करीब 12 घंटे तक हुई झमाझम बारिश से पूरा प्रखंड जलमग्न हो गया. इस वर्ष अब तक की यह सबसे अधिक वर्षा मानी जा रही है. मौसम विभाग के अनुसार प्रखंड में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गयी है. लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों और खेतों में पानी भर गया, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे.
खेतों में भरा पानी, धान की रोपाई ने पकड़ी रफ्तार
पिछले एक महीने से मानसून की बेरुखी के कारण धान की रोपाई प्रभावित थी. किसान बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. लगातार हुई वर्षा के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गयी है. प्रखंड के मोहानी, रतनपुर, लीलादह, बिरनिया, बकसरा, कारूडीह, सकरी और पिंडरा हाट सहित लगभग सभी पंचायतों के खेतों में तीन से चार इंच तक पानी भर गया है. किसान बबलू हांसदा ने बताया कि अब खेत धान की रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो गये हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से खेत जोतकर तैयार किये गये थे, लेकिन पानी नहीं होने के कारण रोपाई शुरू नहीं हो पा रही थी. अब किसान मजदूरों की मदद से रोपाई का कार्य शुरू कर रहे हैं. वहीं किसान नरेश राय ने कहा कि कुछ दिन पहले तक सूखे की आशंका बनी हुई थी, लेकिन समय पर हुई बारिश से अब अच्छी फसल की उम्मीद जगी है.
चिर नदी में बढ़ा जलप्रवाह
लगातार बारिश के कारण क्षेत्र की प्रमुख चिर नदी में जलप्रवाह काफी तेज हो गया है. नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बरती जा रही है. प्रखंड कृषि पदाधिकारी कुमोद मेहरा ने बताया कि इस बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है. अब धान के साथ-साथ मक्का, अरहर तथा सब्जियों की बुवाई में भी तेजी आएगी. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि समय पर रोपाई करें तथा खेतों में अधिक जलभराव होने पर उचित जलनिकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें.
बाजार और जनजीवन पर पड़ा असर
लगातार वर्षा के कारण सोमवार को प्रखंड मुख्यालय तथा विभिन्न हाट-बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में कम चहल-पहल रही. स्कूल जाने वाले बच्चों को छाता और रेनकोट का सहारा लेना पड़ा. कई स्थानों पर पेड़ गिरने तथा सड़कों पर जलजमाव की भी सूचना मिली, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि, किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है. पर्याप्त वर्षा होने से क्षेत्र में अच्छी खेती और बेहतर पैदावार की उम्मीद बढ़ गयी है. अब किसानों को भरोसा है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो इस वर्ष धान सहित अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर होगा.
