महागामा थाना क्षेत्र के शीतल गांव के पास सोमवार की सुबह हुए भीषण सड़क हादसे के बाद दर्जनों की संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जुट गये. लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखा गया. ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कार्य में ठेकेदार और एजेंसी की घोर लापरवाही को हादसे का प्रमुख कारण बताया. ग्रामीणों का कहना है कि शीतल गांव के पास तीखे मोड़ पर न तो बेरिकेडिंग की गयी है और न ही डिवाइडर लगाया गया है, जिससे बार-बार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है. तेज गति से आने-जाने वाले वाहनों को मोड़ पर संतुलन बनाने में कठिनाई होती है, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनता है. स्थानीय लोगों ने कई बार सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की थी, लेकिन संवेदक और एजेंसी ने इसे नजरअंदाज कर दिया.
जनवरी से चल रहा है निर्माण, लेकिन सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां
इस सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी, जो महागामा से दिग्घी (बिहार बॉर्डर) तक करोड़ों रुपये की लागत से बन रही है. कार्य के दौरान लगातार आम जनता को आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन निर्माण एजेंसी और प्रशासन ने सुरक्षा के मानकों को नजरअंदाज कर दिया. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सड़क किनारे मजबूत रेलिंग या गार्डवाल होती, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था. शीतल गांव से कहलगांव की दूरी महज 10-12 किलोमीटर है, फिर भी मोड़ पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये गये.मिलनसार और मददगार थे योगेंद्र, नियति ने फिर पहुंचा दिया गंगा किनारे
हादसे में जान गंवाने वाले ईसीएल कर्मी योगेंद्र यादव के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि वे अत्यंत मिलनसार, मददगार और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे. दुर्गा पूजा, छठ, शादी-ब्याह और हर धार्मिक अनुष्ठान में वे बढ़-चढ़कर सहयोग करते थे. जब भी कोई जरूरतमंद उनके पास पहुंचता, वे बिना किसी हिचकिचाहट के मदद करते थे. बताया गया कि हादसे के दिन वे अपनी पत्नी बिंदेश्वरी देवी और पड़ोसन कौशल्या देवी के साथ गंगा स्नान के लिए कहलगांव गये थे, ताकि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा कर सकें. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. स्नान कर पवित्रता के साथ लौटते वक्त वे फिर गंगा के ही किनारे दुर्घटना में दम तोड़ बैठे. यह दृश्य हर किसी को अंदर तक झकझोर गया.
बारिश के बीच गड्ढे से शव निकालने में जुटे रहे पुलिस और ग्रामीण
महागामा थाना क्षेत्र के शीतल गांव के पास सोमवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद जहां एक ही परिवार के शव गड्ढे में फंसे हुए थे, वहीं उस समय जोरदार बारिश भी शुरू हो गयी. इसके बावजूद बचाव कार्य में जुटी पुलिस और ग्रामीणों ने अद्भुत साहस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया. तेज बारिश के बीच महागामा के एसडीपीओ चंद्रशेखर आजाद और हनवारा थाना प्रभारी राजन कुमार राम स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहे. उन्होंने अपने दल-बल के साथ भीगते हुए शवों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया. पूरी टीम ने बिना किसी देरी के राहत एवं बचाव कार्य में तेजी दिखाते हुए मौके की गंभीरता को समझा और तुरंत कार्रवाई शुरू की.परवेज ने दिखाई बहादुरी, घायल होने के बावजूद निभाया मानव धर्म
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एक और नाम चर्चा में है-स्थानीय ग्रामीण मोहम्मद परवेज, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना शवों को बाहर निकालने में पुलिस की मदद की. तेज बारिश, कीचड़ और जोखिम के बावजूद परवेज वाहन के भीतर फंसे शवों को निकालने में जुटे रहे. इस दौरान उन्हें हल्की चोटें भी आईं, लेकिन उनका साहस और समर्पण देखते ही बनता था. परवेज की इस मानवता और निस्वार्थ सेवा की सराहना सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जिले भर में हो रही है। लोग उन्हें ””””रियल हीरो”””” कहकर सम्मानित कर रहे हैं.
भीगी वर्दी में इंसानियत का फर्ज निभाया
इस हादसे ने एक ओर जहां पूरे इलाके को गमगीन कर दिया, वहीं राहत और बचाव कार्य में लगे पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि मानव सेवा की पहचान भी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
