छह वर्षों से जलजमाव की मार झेल रहा सरकंडा चौक, अब जागा एनएच प्रशासन

एनएच प्रशासन जलजमाव से निजात दिलाने को लेकर काम आरंभ किया

गोड्डा शहर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल सरकंडा चौक की जलजमाव की समस्या अब विकराल रूप ले चुका है. बीते छह वर्षों से यहां के लोग बारिश के मौसम में घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि दुकानों में पानी घुस रहा है और तेज रफ्तार से गुजरते वाहन लोगों को कीचड़ और गंदे पानी से सराबोर कर रहे हैं. पूर्व में यह सड़क पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत थी, लेकिन इसके एनएच को हस्तांतरण के बाद सड़क चौड़ीकरण तो हुआ, लेकिन जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गयी. इससे स्थानीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है.

आंदोलन की चेतावनी के बाद हरकत में आया एनएच और नगर परिषद

हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता बच्चू झा द्वारा किये गये प्रतीकात्मक स्नान प्रदर्शन के बाद जब यह मुद्दा मीडिया में उछला, तब जाकर जिला प्रशासन के निर्देश पर एनएच और नगर परिषद हरकत में आये. शुक्रवार को एनएच अधिकारी जेसीबी, ट्रैक्टर और मजदूरों के साथ सरकंडा चौक पहुंचे. पहले सड़क पर जमा गाद हटाया गया, फिर प्रधानी जमीन तक बने नाले की सफाई शुरू की गयी. लेकिन सबसे बड़ी बाधा नाले पर बने ढक्कन को लेकर सामने आयी. जानकारी के अनुसार, नाले पर ढलाई कर सीमेंट स्लैब डाल दिया गया है, जिसे हटाना बेहद मुश्किल हो रहा है. जानकारों का मानना है कि जब सड़क एनएच को हस्तांतरित की गयी थी, तब पीडब्ल्यूडी द्वारा बिना किसी तकनीकी योजना और मंजूरी के नाले का निर्माण कर दिया गया था. नाला नेशनल हाईवे के मानकों के अनुरूप नहीं है, न ही उसकी चौड़ाई उपयुक्त है. सबसे बड़ी चूक यह रही कि ढक्कन अलग से न बनाकर नाले के ऊपर ही ढलाई कर दी गयी, जिससे अब सफाई कार्य बाधित है.‘पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा बिना किसी योजना और अनुमति के उक्त सड़क के किनारे नाले का निर्माण कर दिया गया है, जो नेशनल हाईवे के मानकों के अनुरूप नहीं है. नाले की चौड़ाई भी उपयुक्त नहीं है और ढक्कन को अलग से न बनाकर सीधे उस पर ढलाई कर दी गयी है, जिससे सफाई में भारी दिक्कत आ रही है. हम नगर परिषद की मदद से सरकंडा चौक पर जमा पानी को मशीनों के माध्यम से निकालने का प्रयास कर रहे हैं.

-रोहित कुमार, एनएच पदाधिकारी, देवघर

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सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप, स्थानीय लोगों ने लगायी गुहार

एक ओर जहां सरकंडा चौक में जलजमाव की समस्या ने आमजन का जीवन दूभर कर दिया है, वहीं दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद चौक से पथरा चौक होते हुए चपरासी टोला-बापू चौक तक बनने वाली सड़क निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगा है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि करीब 4.5 करोड़ रुपये की लागत से बन रही सड़क में न तो तय मापदंडों का पालन हो रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क की चौड़ाई 17 फीट और मोटाई 12 इंच निर्धारित की गयी है. लेकिन कहीं नाले को मिलाकर 17 फीट, तो कहीं महज 15 फीट तक ही ढलाई की जा रही है. ठेकेदार द्वारा सीमेंट के साथ मिट्टी मिली बालू और घटिया चिप्स से सड़क बनायी जा रही है. सबसे गंभीर बात यह कि संयुक्त हिस्सों (ज्वॉइंट्स) पर सरिया तक नहीं डाला गया है, जिससे सड़क जल्दी टूटने की आशंका है. चपरासी टोला मुहल्ले में पहले नाला निर्माण किया जाना था, लेकिन नियमों को ताक पर रखते हुए ठेकेदार और विभाग के इंजीनियरों ने पहले सड़क की ढलाई कर दी. बारिश के चलते टूटी हुई नालियों से गंदा पानी सीधे लोगों के घरों में घुस रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार विरोध कर चुके हैं, लेकिन विभाग अपनी मनमानी पर अड़ा है. कुछ दिनों पहले बापू चौक के समीप स्थानीय लोगों ने काम रुकवाया, लेकिन बाद में प्रशासन ने दबाव डालकर निर्माण शुरू करा दिया. आरटीआई कार्यकर्ता रंजीत कुमार ने कहा कि सड़क निर्माण में प्राक्कलन के नियमों की घोर अनदेखी की जा रही है. बॉक्स कटिंग न किये जाने, घटिया सामग्री के उपयोग और अनियमित मापदंडों के कारण यह सड़क कुछ ही समय में जर्जर हो जाएगी. उन्होंने इसे सरकार के पैसों की खुली लूट बताते हुए कहा कि जल्द ही इस संबंध में डीसी से शिकायत की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में प्राक्कलन की अनदेखी, सरकार के पैसों की बर्बादी हो रही है. स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग किया है कि सड़क और नाला निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच करायी जाये और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर कार्रवाई की जाये. लोगों का कहना है कि जब तक जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया जाएगा, तब तक गोड्डा की बुनियादी समस्याएं खत्म नहीं होंगी.‘सड़क निर्माण कार्य एक संवेदक को जबकि नाला निर्माण कार्य किसी अन्य संवेदक को आवंटित किया गया है. सड़क का कार्य संबंधित संवेदक द्वारा कराया जा रहा है. इस संबंध में मुझे विस्तृत जानकारी नहीं है. हालांकि सड़क की ढलाई मानकों के अनुसार की जा रही है.

-योगेन्द्र मंडल, कनीय अभियंता, पीडब्ल्यूडीB

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Author: SANJEET KUMAR

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