मानसून ने बिगाड़ा रसोई का बजट, गोड्डा में हरी सब्जियों के दाम हुए दोगुने

गोड्डा में लगातार बारिश के कारण हरी सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम लोगों का रसोई बजट बिगड़ गया है। जानें क्या हैं सब्जियों के ताजा भाव।

भीषण गर्मी से राहत लेकर आया मानसून अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगा है. लगातार हो रही बारिश के कारण हरी सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है. करीब एक पखवाड़े पहले तक आम लोगों की पहुंच में रहने वाली अधिकांश सब्जियों के दाम अब दोगुने तक बढ़ गये हैं. इसका सीधा असर मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट और रसोई पर पड़ रहा है. बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है. खेतों में जलभराव और फसल खराब होने से गोड्डा की मंडियों में स्थानीय सब्जियों की आवक लगभग बंद हो गयी है. मांग को पूरा करने के लिए अब पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के अन्य जिलों से सब्जियां मंगायी जा रही हैं. हालांकि माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से खुदरा बाजार में इनके दाम भी बढ़ गये हैं. स्थानीय सब्जी विक्रेता लालमोहन ने बताया कि यदि पश्चिम बंगाल और बिहार से सब्जियों की खेप नहीं आये, तो गोड्डा में सब्जियों का संकट उत्पन्न हो सकता है. उन्होंने कहा कि परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में तेजी आयी है, हालांकि बाजार में सब्जियों की उपलब्धता बनी हुई है.

थाली से गायब हो रही हरी सब्जियां

सब्जियों के बढ़ते दामों ने गृहिणियों की चिंता बढ़ा दी है. गृहिणी सुनीता देवी ने बताया कि पहले 200 रुपये में सप्ताहभर की सब्जियां आ जाती थीं, लेकिन अब इतनी राशि में दो दिन का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि बाजार में हरी सब्जियां तो दिखती हैं, लेकिन कीमतें इतनी अधिक हैं कि खरीदना मुश्किल हो गया है. अब घरों में आलू, प्याज और दाल के सहारे ही भोजन तैयार किया जा रहा है. वहीं खरीदार अशोक मंडल ने कहा कि बाजार में ताजी सब्जियां उपलब्ध हैं, लेकिन उनके दाम आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गये हैं. कीमत सुनते ही अधिकांश लोग बिना खरीदारी किये लौटने को मजबूर हैं.

कुछ सप्ताह बाद मिल सकती है राहत

सब्जी कारोबारियों का कहना है कि जब तक बारिश का असर कम नहीं होता और स्थानीय खेतों में नयी फसल तैयार नहीं हो जाती, तब तक बाजार बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों पर ही निर्भर रहेगा. उनका मानना है कि मौसम सामान्य होने और स्थानीय उत्पादन शुरू होने के बाद कीमतों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है. स्थानीय मंडियों में सब्जियों की कमी नहीं है, लेकिन बाहरी राज्यों से माल आने के कारण परिवहन लागत बढ़ गयी है. यही वजह है कि खुदरा बाजार में हरी सब्जियों के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं.

गोड्डा में सब्जियों के खुदरा भाव

टमाटर : ₹50-60 प्रति किलोग्राम

आलू : ₹20 प्रति किलोग्राम

प्याज : ₹40 प्रति किलोग्राम

धनिया पत्ती : ₹400 प्रति किलोग्राम

कौंकरी : ₹200 प्रति किलोग्राम

नेनुआ/तरोई : ₹40-50 प्रति किलोग्राम

भिंडी : ₹40 प्रति किलोग्राम

बैंगन : ₹50-60 प्रति किलोग्राम

परवल : ₹40 प्रति किलोग्राम

करेला : ₹50 प्रति किलोग्राम

झींगा (तुरई) : ₹40 प्रति किलोग्राम

कुंदरी : ₹40 प्रति किलोग्राम

लौकी : ₹30-40 प्रति पीस


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लेखक के बारे में

Author: Sanjeet kumar

Published by: Sweta Vaidya

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