पोड़ैयाहाट में रोजगार की कमी से पलायन की बढ़ी समस्या

मनरेगा ठप, मजदूर और युवा दूसरे राज्यों में जा रहे रोजगार की तलाश में

पोड़ैयाहाट प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा में काम न मिलने की वजह से सैकड़ों मजदूर अब पलायन के लिए विवश हैं. क्षेत्र के अधिकांश आदिवासी मजदूर रोजगार की कमी के कारण अपने परिवार को छोड़कर अन्य राज्यों में काम करने चले जा रहे हैं. सकरी फुलवार, तारतीकर, बाघमारा, फुलवार समेत दर्जनों गांवों के लोग रोजगार के अभाव में पलायन कर रहे हैं. मनरेगा योजना पिछले एक महीने से पूरी तरह ठप है. मनरेगा में काम करने वाले कर्मी अपनी मांगों को लेकर 9 मार्च से हड़ताल पर हैं. प्रखंड क्षेत्र में निबंधित मनरेगा मजदूरों की संख्या 58,000 है, जबकि सक्रिय मजदूरों की संख्या 21,874 है. स्थानीय मजदूरों का कहना है कि गांव में स्थाई रोजगार की व्यवस्था न होने के कारण बड़ी संख्या में युवक अपने परिवार को छोड़कर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मुंबई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. फैक्ट्रियों, भवन निर्माण कार्य और अन्य अस्थाई रोजगार में काम करके वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं.

खेती से नहीं चल रहा परिवार, मजबूरी में पलायन

मजदूरों के अनुसार खेती से मिलने वाली आय इतनी नहीं है कि पूरे परिवार का खर्च चल सके. छोटी जोत और बढ़ती लागत के कारण खेती से लाभ कम होता जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड क्षेत्र में छोटे उद्योग और रोजगार सृजन की योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है. पलायन करने वाले युवाओं का कहना है कि उन्हें अपने परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. कई बार कम मजदूरी और असुरक्षित माहौल में भी काम करना पड़ता है.

कोट

‘एक माह से मनरेगा कर्मी हड़ताल में हैं. हड़ताल से लौटने के बाद कार्य सुचारू रूप से चलेगा.

-संजीव कुमार, बीपीओ (पोड़ैयाहाट)B

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By Sanjeet kumar

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