घरेलू हिंसा पर लगे रोक, महिलाओं के लिए बने सख्त कानून

महिला संवाद. अत्याचार, घरेलू हिंसा और सुरक्षा को लेकर महिलाओं साझा किये विचार, बोलीं

बसंतराय प्रखंड मुख्यालय स्थित बुनकर भवन में सोमवार को प्रभात खबर की ओर से महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में एसएचजी से जुड़ी दर्जनों महिलाओं ने भाग लिया और महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार, घरेलू हिंसा तथा उनकी सुरक्षा को लेकर विचार साझा किये. कार्यक्रम की अध्यक्षता धपरा संकुल की अध्यक्ष पुतुल देवी ने की. संवाद के दौरान महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज महिलाएं न सिर्फ समाज में, बल्कि अपने घरों में भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं. घरेलू हिंसा सबसे गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे महिलाओं का मानसिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है. महिलाओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आए दिन हो रही उत्पीड़न और हिंसा की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. अपराधियों को कठोर सजा मिले ताकि समाज में ऐसा संदेश जाये कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, जिससे महिलाएं अपने अधिकारों को जान सकें और हिंसा के खिलाफ खुलकर आवाज उठा सकें. महिलाओं ने मांग की कि सरकार को इस दिशा में सख्त कानून बनाना चाहिए, जिससे घरेलू हिंसा और यौन शोषण जैसी घटनाओं पर लगाम लगायी जा सके. साथ ही, उन्होंने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से अपेक्षा जतायी कि वे संवेदनशील होकर महिला-संबंधी मामलों में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई करें. कार्यक्रम का संचालन प्रभात खबर के प्रतिनिधि मोहम्मद परवेज आलम ने किया.

क्या कहती है महिलाएं

महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है. हमें निरंतर प्रयास करना होगा ताकि वे स्वयं की सुरक्षा कर सकें और आत्मनिर्भर बनें.

-शांति पहाड़ीन

घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को कानूनी सहायता मिलनी चाहिए. पुलिस-प्रशासन को संवेदनशील होकर कार्य करना होगा, साथ ही व्यापक जागरूकता अभियान भी जरूरी है.

-मुन्नी सोरेन

बच्चों को शिक्षा के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव सिखाना जरूरी है. यही संस्कार समाज में महिला हिंसा को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

-अनिता सोरेन

महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर घरेलू हिंसा के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए. सरकार को भी इस दिशा में ठोस व प्रभावी कदम उठाने होंगे.

-मेरी प्रिस्का हांसदा

घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को मानसिक व भावनात्मक सहयोग मिलना चाहिए. समाज को उनके साथ खड़ा होकर सहयोग करना चाहिए, तभी सकारात्मक बदलाव संभव है.

-मेरी टुडूB

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Author: SANJEET KUMAR

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