तब इंदिरा गांधी,अब दीपिका पांडेय सिंह… 42 साल बाद फिर दिखी वही तस्वीर

1984 में इंदिरा गांधी, 2026 में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह. 42 साल बाद जनभावना के प्रति वही संवेदनशीलता, आंदोलन समाधान की ओर.

गोड्डा, संवाददाता निरभ किशोर की रिपोर्ट. जन आंदोलन और सत्ता के बीच सीधे संवाद की परंपरा को दर्शाती दो तस्वीरें इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं. एक तस्वीर 1984 की है, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे लोगों के बीच पहुंचकर उनका अनशन तुड़वाती नजर आ रही हैं. वहीं दूसरी तस्वीर 2026 की है, जिसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर महागामा विधायक सह राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह छात्रों के आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अनशन तुड़वाती दिखाई दे रही हैं.

अलग दौर, लेकिन जनभावना के प्रति संवेदनशीलता का एक संदेश

सोशल मीडिया पर दोनों तस्वीरों को एक साथ साझा करते हुए कहा जा रहा है कि समय और संदर्भ भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों तस्वीरों में जनभावना के प्रति संवेदनशीलता और समस्या के समाधान के लिए पहल का भाव एक जैसा दिखाई देता है. तस्वीरों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जनप्रतिनिधियों का आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर संवाद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

छात्र आंदोलन में दीपिका पांडेय सिंह की भूमिका रही अहम

झारखंड में हाल के दिनों में हुए छात्र आंदोलन के दौरान महागामा विधायक एवं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण रही. मुख्यमंत्री के निर्देश पर वे आंदोलनकारियों के बीच पहुंचीं, उनकी समस्याएं सुनीं और छात्रों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया. सरकार के अनुसार, उनके प्रयासों से छात्र हित में ठोस निर्णय लेने में मदद मिली और आंदोलन को सकारात्मक दिशा मिली.

1984 में इंदिरा गांधी, 2026 में छात्रों के बीच मंत्री

1984 में इंदिरा गांधी ने देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए जनता के बीच पहुंचकर उनकी आवाज सुनी थी. उसी तर्ज पर 2026 में दीपिका पांडेय सिंह के छात्रों के बीच पहुंचकर संवाद करने की तस्वीर सामने आयी है. दोनों घटनाओं को इस बात के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है कि जब जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर उनकी बात सुनते हैं, तो आंदोलन टकराव के बजाय समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकता है.

जांच, मुआवजा और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर बनी सहमति

सरकार की ओर से कहा गया कि दीपिका पांडेय सिंह की संवेदनशीलता और सक्रिय पहल से छात्र आंदोलन का सकारात्मक निष्कर्ष निकला. उनके हस्तक्षेप के बाद जांच, मुआवजा और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया. इससे आंदोलनकारियों और सरकार के बीच संवाद का रास्ता मजबूत हुआ.


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By Prabhat khabar news desk

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