Godda News, गोड्डा: झारखंड के गोड्डा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सरकारी कामकाज की पोल खोल रहा है. दरअसल जिले के एक दिव्यांग युवक को न तो उसकी बंद पड़ी पेंशन मिल रही है और न ही चलने के लिए ई-व्हीलचेयर. वह अपना हक पाने के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है लेकिन इसके बावजूद प्रशासन का दिल नहीं पसीज रहा.
चलने-फिरने में असमर्थ हैं अमित कुमार मंडल
गोड्डा जिले के अमित कुमार मंडल चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं. दोनों हाथ भी ठीक से काम नहीं करते और बोलने में भी उन्हें कठिनाई होती है. अपने के लिए वह एक महीने में तीन बार करीब 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर सदर प्रखंड कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी.
6 माह से बंद है अमित का पेंशन
परिवार वालों का कहना है कि अमित की दिव्यांग पेंशन पिछले छह महीनों से बंद है. पेंशन बहाली और बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल या इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर के लिए कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से गुहार लगाई गई. सभी आवश्यक कागजात भी जमा किए, लेकिन अब तक न तो पेंशन शुरू हो सका है और न ही ई-व्हीलचेयर. हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है.
सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा जरूरतमंदों को
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाएं कागजों में तो मौजूद हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है. दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की निगरानी और कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि दिव्यांगों के प्रति सिस्टम की सीरियसनेस को दिखाता है. जिस व्यक्ति को सबसे अधिक सहारे और सुविधा की जरूरत है, वही अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है.
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने दिया कार्रवाई का निर्देश
अमित कुमार मंडल का मामला संज्ञान में आते ही झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने गोड्डा डीसी को कार्रवाई का निर्देश दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि झारखंड के इस बेटे को जरूरी ई-व्हीलचेयर देने के साथ साथ सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए.
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