गोड्डा : सांप के डसने के बाद समय पर अस्पताल पहुंचना जिंदगी बचाने में अहम हो सकता है, लेकिन गोड्डा जिले में सर्पदंश के कई मामलों में इलाज से पहले झाड़-फूंक पर भरोसा भारी पड़ रहा है. जून से अगस्त तक जिले में सर्पदंश से 8 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें 10 साल की बच्ची भी शामिल है. तीनों महीनों में सर्पदंश से मौत के मामले सामने आये हैं. सामने आये मामलों में अस्पताल पहुंचने में देरी एक बड़ी वजह रही.
गायचंद में दो दिन में दो मौतें
जून माह में गायचंद गांव में बिरवल साह और कौआ ढाब की एक महिला की दो दिन के भीतर सर्पदंश से मौत हो गयी. दोनों को घरेलू काम के दौरान विषैले सांप ने काटा था. परिजनों ने इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक कराया. इलाज में देरी होने के कारण दोनों की जान नहीं बचायी जा सकी.
सुंदरपहाड़ी में मवेशी चराते समय डसा
जुलाई माह में सुंदरपहाड़ी में शीतलाल सोरेन को मवेशी चराने के दौरान सांप ने काट लिया. परिजन पहले झाड़-फूंक में उलझे रहे. हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और उन्हें बचाया नहीं जा सका. इसी माह पथरगामा के पररखानी की मीला मुर्मू की भी सर्पदंश से मौत हो गयी. वह घर पर थी, तभी विषैले सांप ने डस लिया और उसकी जान घर में ही चली गयी.
अगस्त में भी जारी रहा मौतों का सिलसिला
अगस्त माह में गोड्डा के गौरसन्दा की मनी देवी और करहरा की सनोवर खातून की मौत भी इलाज में देरी के कारण हुई. 12 अगस्त को पंडुआडिह की मिरू मुर्मू की मौत हो गयी. वह मवेशी चरा रही थी, तभी सांप ने काट लिया. अस्पताल देर से पहुंचाये जाने तक उसकी मौत हो चुकी थी.
20 घंटे तक झाड़-फूंक, फिर अस्पताल पहुंची चंदा
सर्पदंश का ताजा मामला महागामा के शाहपुर-बेलाडीहा का है. गुरुवार देर रात 23 वर्षीय चंदा देवी को सोने के दौरान सांप ने काट लिया. परिजन करीब 20 घंटे तक झाड़-फूंक कराते रहे. शुक्रवार सुबह 11 बजे चंदा देवी को सदर अस्पताल लाया गया. तब तक काफी देर हो चुकी थी. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी.
