महागामा. प्रखंड के लहठी गांव स्थित सार्वजनिक दुर्गामंदिर की महिमा अपरंपार है. यहां 45 वर्ष से बांग्ला वैष्णव पद्धति से दुर्गा पूजा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से किया जाता है. पूजा कमेटी अध्यक्ष सुदीप कुमार दास ने बताया कि 1980 में खेपा बाबा द्वारा मां दुर्गा की स्थापना कर पूजा की शुरुआत की गयी थी, जो जारी है. उन्होंने बताया कि आज तक इस मंदिर से भक्त कभी खाली नहीं लौटे है. मां दुर्गा सभी की मनोकामना पूर्ण करती है. शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में चंडी पाठ, आरती पूजन कार्यक्रम से माहौल भक्तिमय हो जाता है. षष्ठी पूजा के शाम में पारंपरिक ढोल बाजे के साथ ग्रामीण व बंगाल से आए पुरोहित बेलवरण आमंत्रण पूजा करने सुंदर नदी किनारे पहुंचते हैं. सप्तमी के सुबह दोला पर मां दुर्गा का आह्वान पूजन कर मंदिर परिसर लाया जाता है. इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की अगुवानी करते हुए रास्ते में अरहर डाल से झाड़ू व दूध गंगाजल बेलपत्र सहित अन्य पूजन सामग्री से छर्रा देते हैं. श्रद्धालु कलश लेकर मंदिर परिसर तक जाते हैं. हजारों लोग पूजा में शामिल होते हैं. अष्टमी को श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर प्रांगण मे मन्नत मांगने व डलिया चढ़ाने के लिए उमड़ती है. नवमी को कुंवारी कन्या भोजन का आयोजन किया जाता है. इस दौरान श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है. दशमी पूजा को भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक नृत्य संगीत प्रस्तुत करते है. एकादशी के सुबह महिलाओं द्वारा मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ाने के बाद मंदिर मे सिंदूर खेला का आयोजन कर मिठाई वितरण किया जाता है और गांव भ्रमण के बाद सुंदर नदी में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन धूमधाम से किया जाता है. वही दुर्गा पूजा के भव्य आयोजन को लेकर पूजा कमेटी सहित सभी ग्रामीण जुटे हुए है.
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