गोड्डा नगर परिषद के वार्ड संख्या 12 में असहायों और राहगीरों को कड़ाके की ठंड एवं असुरक्षा से बचाने के उद्देश्य से निर्मित सरकारी आश्रय स्थल अपने मूल उद्देश्य से भटकते नजर आ रहे हैं. वर्तमान में ये भवन जरूरतमंदों के बजाय नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के ठिकाने में तब्दील हो गये हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम ढलते ही आश्रय स्थलों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. यहां खुलेआम शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है. देखरेख के लिए नियुक्त गार्ड या जिम्मेदार कर्मियों द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने से ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ा हुआ है. भवन के कमरों में फैले कचरे, खाली बोतलों और गंदगी के कारण वहां से गुजरना भी मुश्किल हो गया है. राहगीरों, विशेषकर महिलाओं, में इन स्थलों के आसपास असुरक्षा की भावना व्याप्त है. स्थिति यह है कि शरीफ लोग वहां जाने से भी कतराते हैं. आश्रय स्थल के समीप नगर परिषद का कचरा डंपिंग स्थल एवं मीट मंडी होने के कारण क्षेत्र में लगातार गंदगी और दुर्गंध बनी रहती है, जिससे समस्या और गंभीर हो गयी है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्ष 2019 में नगर परिषद द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाये गये ये आश्रय स्थल आज प्रशासनिक उपेक्षा और पुलिस की निष्क्रियता के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच गये हैं. लोगों ने आशंका जतायी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गयी, तो यहां किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक सरकारी संपत्तियों पर असामाजिक तत्वों का कब्जा बना रहेगा और प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम कब उठाएगा.
सरकारी आश्रय स्थल बना असामाजिक तत्वों का अड्डा, आम लोगों का ठहरना मुहाल
गरीबों और मुसाफिरों के लिए बने भवनों में नशाखोरी का जमावड़ा, स्थानीय लोगों में आक्रोश
