निषेधाज्ञा के बावजूद दिशोम बैसी की बैठक, बिहार, बंगाल और ओडिशा से आये मांझी हड़ाम, नायकी, गोड़ैत व धर्मगुरु

Dishom Baissie Meeting: झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में आयोजित दिशोम बैसी की बैठक में झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से मांझी, हड़ाम, नायकी, गोड़ैत और धर्मगुरु पहुंचे. सभी ने एक स्वर में कहा कि जाहेर थान जहां है, वहीं रहेगा. उन्होंने सड़क निर्माण करने वाली कंपनी और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये.

Dishom Baissie Meeting: गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट के हरियारी गांव के पास हंसडीहा-महगामा एनएच 133 पर निर्माणाधीन फोरलेन के बीच जाहेरथान आने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जाहेरथान बचाने को लेकर रविवार को हरियारी में दिशोम बैसी की बैठक की गयी. आदिवासियों की इस महापंचायत में संताल परगना के अलावा बिहार, बंगाल व ओडिशा से बड़ी संख्या में मांझी हड़ाम, नायकी, गोड़ैत, परगनैत आदि शामिल हुए.

बैठक से पहले लगायी गयी थी निषेधाज्ञा

दिशोम बैसी की बैठक को लेकर उक्त स्थान पर प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा लगाया गया था. बावजूद आदिवासियों की बैठक सुबह से शाम तक निरंतर चलती रही. इस दौरान पुलिस बल का अता-पता भी नहीं रहा. बैठक के बाद आदिवासियों के धर्मगुरुओं ने एक स्वर में कहा कि जाहेरथान जहां है, वही रहेगा. जाहेरथान का स्थान परिवर्तन स्वीकार नहीं होगा. आदिवासी परंपरा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगा. आदिवासियों का कहना था कि ऐसे मामले में प्रशासन ने ठेका कंपनी को ही सहयोग किया. आदिवासियों के हितों को छोड़कर सड़क बनाने वाली कंपनी के प्रति ज्यादा ध्यान है.

बैठक में आक्रोशित दिखे आदिवासी समाज के लोग

दिशोम बैसी की बैठक के दौरान आदिवासी संगठन की ओर से शामिल सभी लोगों से बारी-बारी से राय मशविरा लिया गया. चर्चा के दौरान आदिवासियों की परंपरा के साथ किसी भी प्रकार के छेड़छाड़ नहीं किये जाने की बात पर बल दिया गया. आदिवासी समुदाय की ओर से कहा गया कि उनका समाज हमेशा सखुआ पेड़ की पूजा अर्चना करता रहा है. प्रकृति पूजा करनेवाले आदिवासी समाज के लोगों को इस बात की जानकारी है कि वो अपने धार्मिक स्थल की सुरक्षा किस तरह से कर सकते हैं. सड़क बनाने को लेकर जब सर्वे का काम किया जा रहा था तो उस वक्त भू-अर्जन विभाग की ओर से आदिवासियों से किसी भी प्रकार का राय क्यों नहीं लिया गया?

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भू-अर्जन विभाग व सड़क निर्माण कंपनी करा रही विवाद : राजेश

दिशोम बैसी की बैठक का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता राजेश हांसदा ने कहा कि भू-अर्जन विभाग व सड़क निर्माण की ठेका कंपनी ने आदिवासियों को गुमराह कर गलत सर्वे कराकर उनके धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने का काम किया है. जिस विधि-विधान की बात आदिवासी समाज के लोग करते हैं, उनके हित का ख्याल नहीं रखा गया है.

दिशोम बैसी की बैठक में मौजूद आदिवासी समाज के लोग. फोटो : प्रभात खबर

‘अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा आदिवासी समाज’

कहा कि आदिवासी समाज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. प्रशासन भी इस मामले में उल्टे कंपनी का ही साथ दे रहा है. किसी की कीमत पर जाहेरथान को हटाकर सड़क बनाने नहीं दिया जायेगा. वहीं डीबीएल कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जाहेरथान को स्थानांतरित करने को लेकर जिस ग्राम सभा में ग्रामीणों के हस्ताक्षर से दिखाया गया है, वह पूरी तरह फर्जी है. आवेदन में मुखिया तक का हस्ताक्षर भी फर्जी है. इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री तक पत्र के माध्यम से दी जा रही है.

बैठक में ये सभी थे शामिल

हरियारी पंचायत की मुखिया मुन्नी हांसदा, पंचायत समिति मेरी मुर्मू ,अनिल टुडू, सुरेंद्र मुर्मू,अवध किशोर हांसदा, सुखलाल सोरेन, दारोथी सोरेन, मेरी मुर्मू, सुभाष मरांडी, पुष्पेंद्र टुडू, श्याम हेंब्रम, जगदीश हेंब्रम, राजेश हांसदा, रावल हेंब्रम, सुरेंद्र मुर्मू, बिपिन बास्की, महेश सोरेन, जेम्स मुर्मू , महेंद्र टुडू, सोनोत मुर्मू, संजय सोरेन, मुकेश मुर्मू, नरेश किस्कू आदि मौजूद थे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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