शारदीय नवरात्र के प्रथम दिवस पर महागामा के प्राचीन दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं ने कहलगांव स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से लाया गया पवित्र जल अर्पित किया. इस दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने लगभग 41 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर गंगाजल को मां दुर्गा को समर्पित किया. पूजन कार्यक्रम के दौरान राज पुरोहित जयशंकर शुक्ला ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा लाया गया गंगाजल नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक पूजा-अर्चना में उपयोग किया जाएगा. जलार्पण के लिए चली पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लगाये गये जय माता दी के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया. यात्रा मार्ग में दिग्घी, नयानगर और अन्य स्थानों पर स्थानीय लोगों ने सेवा शिविर लगाकर श्रद्धालुओं को शरबत, फल और विश्राम की सुविधा प्रदान की. सेवा भाव से ओत-प्रोत इन शिविरों ने नवरात्र के प्रारंभ को और भी आध्यात्मिक व सामाजिक रूप से समृद्ध बना दिया. दोपहर में महागामा दुर्गा मंदिर में तांत्रिक विधि से कलश स्थापना की गयी. इस अवसर पर राजा मोल ब्रह्म के वंशजों द्वारा मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा की गयी. शाम होते-होते व्रतधारी महिलाओं ने दीप जलाकर मां दुर्गा की आराधना की, जिससे मंदिर परिसर में एक दिव्य और भक्तिपूर्ण वातावरण उत्पन्न हो गया. महागामा प्रखंड के ऊर्जानगर, लहठी, खुटहरी, संग्रामपुर समेत कई दुर्गा मंदिरों में भी नवरात्र के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा-भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना की.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
