520 बच्चों के लिए सुरक्षित कक्ष और किचन शेड की अभाव में शिक्षा प्रभावित

राजमहल कोल परियोजना के खनिज राजस्व के बावजूद गोपालपुर विद्यालय जर्जर भवन में

बोआरीजोर प्रखंड क्षेत्र में संचालित देश की सबसे बड़ी ओपन कोल माइंस, राजमहल कोल परियोजना से गोड्डा और झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश को ऊर्जा मिलती है. परियोजना द्वारा हर साल करोड़ों रुपये का मुनाफा होने के बावजूद, प्रखंड का एक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय जर्जर भवन की दुर्दशा में है. लीलातरी-2 पंचायत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय गोपालपुर में 520 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन स्कूल भवन और किचन शेड की स्थिति चिंताजनक है. विद्यालय में कुल सात कमरे हैं, जिनमें से तीन पूरी तरह जर्जर हैं. बच्चों को केवल चार कमरे और बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है. जर्जर कमरे और बरामदे में फर्श पर मलवा गिरने से बच्चों को लगातार सावधान रहना पड़ता है.

सुरक्षा और सुविधाओं की कमी

जर्जर भवन के कारण न केवल बच्चे असुरक्षित हैं, बल्कि स्कूल में रखा सामान भी चोरी का शिकार हो चुका है. बाउंड्री वॉल के अभाव में बच्चे आसानी से मैदान से बाहर चले जाते हैं. किचन शेड भी जर्जर है, जिससे 500 बच्चों का प्रतिदिन भोजन तैयार करना रसोईया के लिए चुनौती बन गया है.

ग्रामीणों और प्रबंधन की शिकायत

स्थानीय ग्रामीण और स्कूल प्रबंधन ने कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर भवन, चहारदीवारी और किचन शेड के नवीनीकरण की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के कोल परियोजना के खनिज राजस्व के बावजूद भी इस स्कूल का जर्जरभवन सुधारा नहीं गया. विद्यालय की दुर्दशा बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है.

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Author: SANJEET KUMAR

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