पथरगामा प्रखंड के शक्तिपीठ चिहारो पहाड़ स्थित चैती दुर्गा मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र के उपलक्ष्य पर भागवत कथा शुरू हो गया है. अयोध्या धाम से पधारे आचार्य पवन जी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि चिहारो पीठ ऐतिहासिक प्राकृतिक स्थल होने के साथ-साथ एक दिव्य भूमि है. यहां अलौकिक शक्तियां विचरण करती रहती है. यह दिव्य भूमि है, जो ऋषियों की तपस्या से जागृत रहती है. आचार्य ने कहा कि उन्होंने अब तक 70 दिन और 70 रात चिहारो पीठ में बिताया है, जहां उन्हें दिव्य शक्तियों की अनुभूति हुई है. भागवत कथा के क्रम में आचार्य पवन जी महाराज ने कहा कि मायारूपी संसार में रहते हुए माया से निर्लिप्त कैसे रहा जाये. उन्होंने कहा कि कमल फूल कीचड़ में जन्म लेकर भी कीचड़ और जल से ऊपर रहता है. ऋषियों का उदाहरण देते हुए कहा कि नर से नारायण बनने की प्रक्रिया भारतीय अध्यात्म का अनमोल सोपान है. कहा कि भागवत के श्रवण से मानव को संस्कार मिलता है. मन और बुद्धि पवित्र होता है. जन्म-मरण के चक्कर से मुक्ति मिलती है. कहा कि भगवान ने मानव को धरती पर अच्छे कर्म करने के लिए भेजा है. मानव में जन्म लिया है, तो बुद्धि और शक्ति का उपयोग भगवान का पूजन और भजन में लगाने के साथ परमार्थ में लगाना चाहिए. जीव को चौरासी लाख योनि भटकने के बाद यह मानव शरीर मिलता है. इसलिए मानव जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित कर परमात्मा को प्राप्त करने में लगाना चाहिए. कथावाचक ने कहा कि जो मानव जीवन पाकर भगवान के भजन-कीर्तन में नहीं लगाता, वह आत्महत्या के समान है. मानव शरीर मरणशील है. आत्मा का वाहन शरीर है. आत्मा न कभी मरता है और न जलता है. आत्मा तो केवल शरीर बदलता रहता है. इस दौरान भगवान के 24 अवतारों की कथा को आचार्य ने सुनाया. इस मौके पर पूजा समिति अध्यक्ष संतोष कुमार महतो, बलराम कुमार, रतन महतो, सिकंदर यादव, विकास यादव, सत्यप्रकाश पंडित, अरविंद यादव, आनंद बिहारी समेत बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद थे.
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