प्रतिनिधि, पथरगामा : सरकार हर घर नल-जल और लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पथरगामा में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है. प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) के मुख्य द्वार के ठीक बगल में लगा सरकारी चापाकल पिछले छह माह से खराब पड़ा है. लंबे समय से खराब चापाकल अब पानी देने के बजाय महज शोपीस बनकर रह गया है.
रोजाना पहुंचते हैं शिक्षक, छात्र और अभिभावक
बीआरसी कार्यालय में प्रतिदिन शिक्षक, शिक्षा सेवक, छात्र-छात्राएं और अभिभावक विभिन्न कार्यों से पहुंचते हैं. गर्मी के दिनों में प्यास लगने पर लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. कार्यालय के ठीक सामने चापाकल मौजूद होने के बावजूद उससे पानी नहीं मिलने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है.
छह महीने से खराब, अब तक नहीं हुई मरम्मत
स्थानीय लोगों का कहना है कि चापाकल लंबे समय से खराब है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से इसकी मरम्मत के लिए अब तक ठोस पहल नहीं की गयी है. लोगों को मजबूरी में बाहर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है या फिर प्यासे ही लौटना पड़ता है.
बीआरसी में नहीं सुधरा चापाकल तो गांवों का क्या होगा?
लोगों का सवाल है कि जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग प्रखंड के मुख्य सरकारी कार्यालय परिसर में खराब पड़े चापाकल की छह माह में मरम्मत नहीं करा पा रहा है, तो सुदूर ग्रामीण इलाकों में खराब पड़े चापाकलों की स्थिति क्या होगी. सरकारी कार्यालय के सामने ही पेयजल सुविधा की यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से अविलंब चापाकल की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि बीआरसी आने वाले शिक्षक, छात्र, अभिभावक और अन्य लोगों को आसानी से पेयजल उपलब्ध हो सके.
