ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व गुरुवार को पूरे क्षेत्र में अकीदत और भाईचारे के साथ मनाया जाएगा. पर्व को लेकर मुस्लिम समाज के लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं. बाजारों में रौनक बढ़ गयी है तथा कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी लगभग पूरी हो चुकी है. मस्जिदों और घरों में साफ-सफाई का कार्य भी तेज गति से किया जा रहा है. धार्मिक जानकारों के अनुसार, ईद-उल-अजहा त्याग, बलिदान और इंसानियत की सेवा का पर्व है. यह त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम द्वारा अपने पुत्र हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. इमाम ईदगाह गदाल बाग, बसंतराय के मौलाना मुबारक हुसैन कासमी ने बताया कि इस पर्व का मुख्य संदेश जरूरतमंदों की मदद करना और समाज में भाईचारा कायम रखना है. उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर की नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मौजूद लालच, अहंकार और बुरी आदतों की भी होनी चाहिए. कुर्बानी का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को नेक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में हलाल कमाई को महत्व दिया गया है और मेहनत व ईमानदारी से अर्जित धन से की गयी इबादत ही स्वीकार्य मानी जाती है. उन्होंने बताया कि कुर्बानी के गोश्त को तीन भागों में बांटने की परंपरा है-एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों के लिए तथा तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों के लिए. इससे समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है. ईद-उल-अजहा के अवसर पर सुबह ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाएगी. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई देंगे. बच्चों और युवाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. बाजारों में कपड़े, टोपी, इत्र एवं सेवईं की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है. स्थानीय लोगों ने कहा कि ईद का असली संदेश आपसी भाईचारा, प्रेम और जरूरतमंदों की मदद करना है.
बसंतराय में ईद-उल-अजहा की तैयारियां पूरी, बाजारों में बढ़ी रौनक
बकरीद पर भाईचारे और त्याग का संदेश, इमाम ने दी सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील
