गंदगी व अव्यवस्था के बीच बसंतराय मेला शुरू
सात दिवसीय बसंतराय का ऐतिहािसक विशुआ मेला शुरू हो गया है. राजकीय मेला का दरजा देने की मांग के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है. जान लोखिम में डालकर लोगों ने पूजा-अर्चना की.
गोड्डा : बसंतराय में शुक्रवार को ऐतिहासिक बसंतराय मेला शुरू हो गया है. सतुआनी पर्व के नाम से चर्चित बसंतराय तालाब के किनारे लगनेवाले करीब तीन से चार सौ वर्ष पुराने इस मेला में भीड़ के बावजूद लोगों उपेक्षित रहे. करीब पांच लाख की बोली पर मेला का डाक हुआ मगर बेहतर व खूबसूरत मेला लगाने को लेकर प्रखंड व जिला प्रशासन ने दिलचस्पी नहीं दिखायी. इस कारण गंदे तालाब में तकरीबन 15 से 20 हजार साफाहोड़ समाज के आदिवासियों ने आस्था की डुबकी लगायी. इस दौरान साफाहोड़ के गुरुओं द्वारा दो से तीन हजार लोगों को दीक्षा दी.
क्या रही स्थिति :केंद्र व राज्य सरकार की ओर से स्वच्छता व ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए लगातार कार्यक्रम कर सरकार डंका पीट रही है. वहीं दूसरी तरफ राजकीय दर्जा पाने के मुहाने पर खड़ा बसंतराय का ऐतिहासिक सांस्कृतिक व लोकप्रिय तालाब व मेला प्रशासनिक उपेक्षा का मार झेल रहा है. 52 बीघा के मेले में श्रद्धा से अभिभूत होकर हर साल करीब पंद्रह से बीस हजार आदिवासी सपाहोड़ स्नान कर विशेष अनुष्ठान कर दीक्षा लेते हैं.
बंगाल बिहार से आनेवाले साफाहोड़ जो हमेशा पवित्रता का पालन करता है. गंदगी के साथ गंदे पानी में स्नान कर अपने कार्यक्रम को पूरा किया. वहीं दूसरी तरफ पांच लाख रुपये के मेला को डाक लेने वाले ठेकेदार के केवल उगाही और कठोर स्वभाव के कारण लोगों की अपेक्षाओं को दर किनार करने का काम किया है. प्रखंड प्रशासन की ओर से केवल दो टैंकर पानी की व्यवस्था की गयी है.
