परिजनों ने लगाया महगामा रेफरल अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप
चिकित्सकों द्वारा सुधि नहीं लेने पर कराया सदर अस्पताल में भरती
अस्पतालों में सुरक्षित व संस्थागत प्रसव पर फिर उठा सवाल
गोड्डा : सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित व संस्थागत प्रसव फिर सवालों के घेरे में आ गया है. अस्पतालों में गर्भवती का बेहतर देखभाल नहीं होने के कारण शिशु की जान चली गयी है. एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है. रविवार की शाम सदर अस्पताल में प्रसूता पूजा मंगल कर्मकार को भरती कराया गया. प्रसव वेदना से जूझ रही प्रसूता के गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी. सदर अस्पताल की महिला विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ प्रभा रानी सहित एनीथिसिया चिकित्सक के सहयोग से प्रसूता प्रसव करा कर उसकी जान बचा ली गयी है.
क्या है पूरा मामला : मेहरमा के बेलडीहा निवासी प्रभाकर कर्मकार की पत्नी पूजा मंगल कर्मकार को प्रसव वेदना होने पर तीन दिन पूर्व महगामा रेफरल अस्पताल में भरती कराया गया था. परिजनों ने बताया कि भरती कराने के बाद रेफरल अस्पताल के चिकित्सक ने चेकअप करने के बाद कहा कि अभी प्रसव होने में 18 दिन शेष है. इस दौरान प्रसूता दर्द से रेफरल अस्पताल में कराहती रही. मगर किसी चिकित्सक ने उसकी सूधि नहीं ली. थक हार कर परिजनों ने सदर अस्पताल में भरती कराया गया.
पथरगामा में भी शिशु की हुई थी मौत : पथरगामा सीएचसी में प्रसव कराने के दौरान 22 मार्च को भी एक शिशु की मौत हो गयी थी. पथरगामा निवासी मदनलाल विश्वकर्मा की पुत्री दीपशिखा देवी के डिलेवरी के मामले में लापरवाही बरतने के कारण शिशु की मौत हो गयी थी. मामले को लेकर परिजनों द्वारा जम कर हंगामा किया. इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है.
प्रसूता को काफी गंभीर स्थिति में सदर अस्पताल लाया गया था. दरअसल, प्रसूता के गर्भ में शिशु की मृत्यु हो चुकी थी. एनीथिसिया चिकित्सक का सहयोग लेकर किसी तरह मृत शिशु का प्रसव करा कर जच्चा की जान बचा ली गयी.
डॉ प्रभा रानी, स्त्री रोग विशेषज्ञ
