चार दिवसीय दिव्य महालक्ष्मी सूर्य यज्ञ का समापन
सूर्य की आराधना से नवग्रह होते हैं शांत : चेतनानंद जी महाराज
हवन से माइग्रेन और साइनस की बीमारी का होता है नाश
गोड्डा : स्थानीय मेला मैदान में रविवार को चार दिवसीय दिव्य महालक्ष्मी सूर्य यज्ञ का समापन हो गया. 108 कुंडीय महायज्ञ में शहर के हजारों श्रद्धालुओं ने हवन किया. आचार्य स्वामी चेतनानंद जी महाराज के अनुसरण पर सभी भक्तों ने यज्ञ कुंड का परिक्रमा कर नारियल तथा अन्य फल व आहूति दी. हवन के बाद प्रेस वार्ता पूछे गये सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी में सूर्य और लक्ष्मी की उपासना से ही यश व वैभव की प्राप्ति होती है. यज्ञ के माध्यम से नवग्रहों शांत किया जाता है. तंत्र साधना के माध्यम से हवन के दौरान नकारात्मक ऊर्जा को बाहर कर भगवान सूर्य सकारात्मक ऊर्जा को लोगों के अंदर प्रवेश कराता है.
उन्होंने हवन और यज्ञ की महत्ता पर विज्ञान से जोड़ते कहा कि माइग्रेन तथा साइनस रोगियों के लिए बड़ा फायदेमंद है. हवन का धुआं शरीर के अंदर तथा मस्तिष्क के तमाम नसों को खोलते हुए रक्त का प्रवाह कराती है. उन्होंने बंगलामुखी मां की पूजा पद्धति की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी पूजा महत्वपूर्ण है. हिंदु धर्म में यज्ञ, जप साधना महत्वूपर्ण है. उन्होंने तंत्र साधना पर अपनी बातों को रखते हुए कहा कि जानकारी के अभाव में लोग तंत्र को बदनाम करते हैं. भगवान शिव ने ही तंत्र विद्या दी है. जहां से विज्ञान खत्म होता है वहीं से ज्ञान शुरू होती है. मनुष्य में असुर और सूर दोनों ही है जरूरत है असुर शक्तियों को दूर करने की.
