पांच और शव दबे होने का दावा

खनन हादसा. मंगलवार को भू-स्खलन के बाद बंद हो गया राहत व बचाव कार्य मलवे में दबे कर्मियों के शव निकालने में राहत व बचाव दल के साथ-साथ इसीएल प्रबंधन भी हताश होने लगा है. कार्य के दौरान लैंड स्लाइडिंग होने पर कर्मी मिट्टी में दबने के डर से भाग जाते हैं. बड़े हादसे में […]

खनन हादसा. मंगलवार को भू-स्खलन के बाद बंद हो गया राहत व बचाव कार्य

मलवे में दबे कर्मियों के शव निकालने में राहत व बचाव दल के साथ-साथ इसीएल प्रबंधन भी हताश होने लगा है. कार्य के दौरान लैंड स्लाइडिंग होने पर कर्मी मिट्टी में दबने के डर से भाग जाते हैं. बड़े हादसे में बचाव कार्य की छोटी व्यवस्था पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं.
गोड्डा : राजमहल कोल परियोजना के इसीएल ललमटिया के भेड़ाय साइड से हादसे के छठे दिन भी मलवे में दबे पांच शव को एनडीआरएफ टीम व आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी नहीं निकाल पाये हैं.
सहयोगियों के अनुसार गुरुवार को घटना से पहले एक माइनिंग सरदार, दो ट्रीप मुंशी, एक सुपरवाइजर, दो गार्ड रनिंग प्वाइंट पर कार्यरत थे. उन सभी का शव बाहर नहीं निकल पाया है. मंगलवार को एक बार पुन: दुर्घटना स्थल दरारें पड़ जाने के कारण राहत व बचाव कार्य ठप कर दिया गया है. मोटे तौर पर कहें तो मुुर्दे को कब्र से बाहर निकालने में इसीएल प्रबंधन व बचाव दल हताश होते जा रहे हैं. दुर्घटना स्थल से मलवे को हटाने में मात्र चार पांच पोकलेन मशीन, मीचिंग मशीन व एक बड़े मशीन का इस्तेमाल ही किया जा रहा है. अपर्याप्त व्यवस्था के अभाव में रेस्क्यू टीम बड़े कामों को ठीक ढंग से अंजाम देने में विफल साबित हो रही है.
परियोजना सूत्रों की मानें तो मिट्टी कटाई व कोयला खनन कार्य में एक शिफ्ट के तीन पाली में वर्कर काम करते थे. तकरीबन एक पाली में 100 से 150 मजदूर काम करते थे. खनन क्षेत्र की लंबाई 300 मीटर है. बीते गुरुवार को भोड़ाय साइट माइंस में 300 मीटर अंदर में काम चल रहा था, इसमें सभी मजदूर मलवे में दब गये थे. प्रबंधन के पदाधिकारी मंगलवार को और पांच शव मलवे में दबे होने का दावा कर रहे हैं. 18 शव निकल चुका है. पांच का दावा किया जा रहा है. प्रबंधन इन फर्जी आंकड़ों से सभी को गुमराह कर रहा है, ऐसा सूत्रों का कहना है.
बड़ी घटना में छोटी रेस्क्यू व्यवस्था : इधर, गोड्डावासियों का कहना है कि कोल माइंस की इस बड़ी घटना में छोटी रेस्क्यू व्यवस्था की गयी है. भूकंप व बाढ़ जैसी घटना के बाद कार्य करनेवाले रेस्क्यू टीम को कोल माइंस दुर्घटना स्थल पर लगाकर प्रबंधन केवल दिन काटने का काम कर रहा है.
घटना के बाद भोड़ाय साइट पर रखे शव की तीस दिसंबर को ली गयी तसवीर.
हादसे में दब गये थे 25 डंपर
परियोजना सूत्रों के अनुसार भूमिगत माइंस में कार्य के दौरान करीब 25 डंपर, चार पॉक लेन मशीन, दो डोजर, दो पेलोडर प्वाइंट पर था. धसान में सभी मशीनें जमींदोज हो गयी थी. इन मशीनों को चलाने वाले वर्कर कहां गये थे!
मुर्दों को दो गज कफन भी नसीब नहीं
घटना के दूसरे दिन 11 शवों के निकलने के बाद प्रबंधन संवेदनहीन बना रहा. मरने के बाद कर्मियों को दो गज कफन भी नसीब नहीं हो पाया है. इसकी निंदा चारों तरफ हो रही है. इसका विरोध सहकर्मियों द्वारा तीस दिसंबर को दुर्घटना स्थल पर किया गया था. अब तो स्थिति यह है कि मुर्दों को माइंस के गहरे खाई से निकालने में प्रबंधन संवेदनहीन होता जा रहा है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >