छठे दिन फिर भूस्खलन रेस्क्यू ऑपरेशन रुका

ललमटिया खदान हादसा. अब भी दबी हैं पांच लाशें रेस्क्यू छोड़ भागे एमडीआरएफ के जवान, वाहन सहित खदान छोड़ा रेस्क्यू टीम के प्रभारी ओपी चौधरी ने कहा -स्लाइडिंग से अपनी जान-माल की सुरक्षा करेंगे स्थिति ठीक होने के बाद किया जाएगा रेसक्यू का कार्य गोड्डा/ बोआरीजोर : राजमहल कोल परियोजना के ललमटिया खदान में भू-स्खलन […]

ललमटिया खदान हादसा. अब भी दबी हैं पांच लाशें

रेस्क्यू छोड़ भागे एमडीआरएफ के जवान, वाहन सहित खदान छोड़ा
रेस्क्यू टीम के प्रभारी ओपी चौधरी ने कहा -स्लाइडिंग से अपनी जान-माल की सुरक्षा करेंगे
स्थिति ठीक होने के बाद किया जाएगा रेसक्यू का कार्य
गोड्डा/ बोआरीजोर : राजमहल कोल परियोजना के ललमटिया खदान में भू-स्खलन के छठे दिन एक भी लाश निकालने में सफलता नहीं मिली. मंगलवार को दिन भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच अपराह्न करीब 3:20 बजे खदान की उत्तर की दिशा से फिर लैंड स्लाइडिंग हुई. खुदाई के दौरान अचानक ऊपर से मलबा गिरने लगा और हो-हंगामा करते हुए सभी जवान वाहन समेत सुरक्षित स्थान पर आ गये.
इस संबंध में जानकारी देते हुए ऑपरेशन प्रभारी ओपी चौधरी ने बताया
कि ऑपरेशन चल रहा था. अचानक ऊपर से स्लाइडिंग हुई. संकेत मिलते ही सभी जवान व सामान समेत भाग निकले. हालांकि स्लाइडिंग से किसी को नुकसान नहीं हुआ है मगर सबसे पहले जान माल की हिफाजत करना आवश्यक था. उन्होंने कहा कि खदान क्षेत्र में अभी भी खतरा बरकरार है. साथ ही यह भी कहा कि स्थिति सामान्य होने तक रेस्क्यू कार्य
बंद रहेगा.
छठे दिन फिर…
पांच लाशें अभी भी दबे
श्री चौधरी के अनुसार उनको मिली लिस्ट के मुताबिक अभी भी पांच लाशें खदान के अंदर दबी हैं. मलबे से ऐसे लोगों को ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. सोमवार की शाम जैकेट व आईडी कार्ड रेस्क्यू कर्मियों को हाथ लगी थी. मलबे से परवेज नामक मजदूर का आई कार्ड एवं जैकेट बरामद किया गया था.
चार दिनों में निकाली गयी थी 18 लोगों की लाश : रविवार की शाम तक 18 लाशें निकाली गयी थी. सोमवार एवं मंगलवार को एक भी लाश निकाल पाना संभव नहीं हो पाया. मजदूरों के सहकर्मियों का कहना है कि जितनी तेजी से उनकी पहल पर जितनी लाशें निकाली गयी, उतनी लाशें टीम भी नहीं निकाल पायी है.
अचानक तीसरी बार लैंड स्लाइडिंग की घटना से खदान के अंदर दबी लाशों को निकाल पाने पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. लोगों में चर्चा है कि जितनी लाशें दफन है वो लगातार डिकम्पोज होने की स्थिति में है. छह-सात दिनों बाद उसे पहचान पाने की समस्या भी रहेगी. हालांकि 200 से 300 फीट की गहराई में अलग-अलग स्थानों पर दबी लाशों को खोज पाना असंभव बताया जा रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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