वर्ष 2016 की घटना ने देश को हिलाकर रख दिया
वर्ष 2001 में कोयला निकालने के लिए गयी नौ महिलाओं व तीन पुरुषों की हुई थी मौत
घटना के बाद सरकार के कड़े रूख के सामने नहीं चली प्रबंधन की
मुख्य महाप्रबंधक पर हुआ था हत्या का मामला दर्ज
तात्कालीन खनन एवं भूतत्व मंत्री रवींद्र राय व ग्रामीण विकास मंत्री प्रदीप यादव ने दौरा कर ग्रामीणों को दिलाया था मुआवजा
30 दिसंबर की इस रूह कंपाने वाली घटना ने खोला परियोजना का पोल
गोड्डा : 26 सितंबर 2001 को इसीएल के खदान में मिट्टी धंसने से 12 लोगों की मौत हो गयी थी. घटना में आसपास तीन गांवों के कुल 12 लोगों में नौ महिलाएं व तीन पुरुष शामिल थे. सुबह के पांच बजे हुई दुर्घटना में मौत के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों के आक्रोश से परियोजना सहित राज्य सरकार व महकमा सकते में आ गया था. चुंकि घटना में मारे गये लोगों का मामला स्थानीय होने के कारण सरकार की नींद जन दबाब के सामने खुल गयी थी. घटना में परियोजना का रूख कोयला चुनने को लेकर मौत का कारण बताया जा रहा था.
मलवे में दबकर मरने वालों में शनीचरी देवी, लता देवी, मुन्नी देवी, मोरिमा बीबी, कलावती देवी, बीबी नदरून, शांति देवी, रजनी देवी, सिहेंश्वरी देवी व तीन पुरुषों में बीरबल पंडित, काली चरण पंडित तथा मो बसीम का नाम शामिल था.
पहुंचे थे तात्कालीन खान एवं भूतत्व तथा ग्रामीण विकास मंत्री
घटना की खबर के बाद राज्य सरकार के खान एवं भूतत्व मंत्री रविंद्र राय के साथ ग्रामीण विकास मंंत्री प्रदीप यादव ललमटिया पहुंचे थे और जांच के बाद ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए 25-25 हजार तथा 10-10 हजार की राशि मुआवजे के तौर दिया गया था. सरकार के मंत्री ने इस घटना में राजमहल कोल परियोजना को दोषी करार देते हुए तात्कालीन मुख्यमहाप्रबंधक एचके झा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी. यहां तक की प्रबंधक आॅपरेशन एसपी सिंह को भी संदेह में कार्रवाई की गयी थी.
क्या कहते हैं भाजपा नेता राजेश झा
2001 में भाजपा के जिला प्रवक्ता सह वर्तमान में वरीय नेता भाजपा राजेश झा ने सरकार से मांग किया कि 2001 की घटना में जहां कि मामला कोयला चुनने को लेकर था , उस वक्त भी प्रबंधक पर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने को लेकर जिम्मेवार ठहराया गया था. आज जब पूरी तरह से प्रबंधक व महालक्ष्मी कंपनी के कारण हुई है दोनों के पदाधिकारी के खिलाफ नामजद आरोपित बनाते हुए हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए.
15 साल बीत जाने के बावजूद परियोजना ने नहीं ली सीख
घटना के 15 साल बाद इसीएल ने घटना को भूला दिया. 30 दिसंबर की शाम सात बजे हुई हृदय विदारक तथा सबसे बड़ी घटना ने राज्य सहित देश काे हिलाकर रख दिया. घटना के ठीक दूसरे दिन दिन भर प्रबंधन के लोग तब नजर आये जब मुख्य सचिव राजबाला वर्मा तथा डीजीपी एक साथ जायजा लेने पहुंचे. घटना में मुख्य रूप से आउट सोर्सिंग कंपनी महालक्ष्मी प्रा लिमिटेड के प्रबंधक तथा कर्मी तो आज तक भूमिगत है. सबसे बड़ी घटना के तीन दिन बीत जाने के बावजूद अब तक परियोजना के किसी भी बड़े पदधिकारी को नामजद अभियुक्त नहीं बनाया गया है और ना ही ठेका कंपनी को ही मामले से जोड़ा जाना लोगों के बीच कई प्रश्न छोड़ गया है. स्थानीय नेताओं के साथ लगभग सभी बड़ी पार्टियों की ओर से मांग उठायी जा रही है कि हादसे के जिम्मेवार प्रबंधक के साथ ठेका कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाये. जांच टीम भी सिर्फ एक ही बात कह रही है कि दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा.
कोल माइंस के कब्रगाह से मिल रहे क्षत-विक्षत शव
