खदान में दफन हो गयी शहाना की जिंदगी

गोड्डा : राजमहल परियोजना के कोल माइंस के खदान के मलवे में दफन हुआ मो नुरूल हसन की बीबी शहाना बानो मात्र आठ माह में ही बेवा हो गयी. हालांकि मध्य प्रदेश से नुरुल की बीबी अपने सोहर का शव लेने तो नहीं पहुंच पायी थी. लेकिन उनके चाचा मो रसीद व छोटा भाई मो […]

गोड्डा : राजमहल परियोजना के कोल माइंस के खदान के मलवे में दफन हुआ मो नुरूल हसन की बीबी शहाना बानो मात्र आठ माह में ही बेवा हो गयी. हालांकि मध्य प्रदेश से नुरुल की बीबी अपने सोहर का शव लेने तो नहीं पहुंच पायी थी. लेकिन उनके चाचा मो रसीद व छोटा भाई मो हारून अपने भतीजा व भाई नुरूल का शव लेने के लिए पहुंचे थे. सदर अस्पताल में शव लेेते समय भाई हारून फूट-फूट कर रोता हुआ कहता गया कि भाई की अभी आठ महीने पूर्व में ही शादी हुई थी. शादी के बाद भाई नुरूल घर परिवार की जिम्मेवारी को लेकर मध्य प्रदेश के रीवा जिला के पहाड़ी गांव से झारखंड के गोड्डा जिले के ललमटिया इसीएल आया था.

दो माह पहले नुरूल घर पहुंच कर कमाई का कुछ रुपया बीबी शहाना बानो के हाथ में देकर पुन: प्रदेश कमाने गया था. नव नवेली दुल्हन शहाना बानो को दो माह बाद ही अपने सोहर का शव देखना पड़ेगा. घर की स्थिति बिगड़ जाएगी. छोटे भाई मो हारून ने बताया कि नुरूल हसन हाइवा व बोल्वो का एक्सपर्ट चालक था. ललमटिया इसीएल आने से पूर्व अपने चाचा मो रसीद के साथ पहले गुड़गांव में हाइवा चला रहा था. परिजनों छोटा भाई मो हारून व चाचा मो रसीद के अलावा इनायत मंसूरी, जान मोहम्मद, मो रफीक, हमीद रजा नुरूल का शव घर मध्य प्रदेश ले जाने के लिए गोड्डा आये थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >