प्रदेश की प्रगति के लिए हर जिले में हो कैबिनेट की बैठक
मुख्यमंत्री की तरफ से जवाब आने पर खुश हैं परिवार के सदस्य
अकबरपुर : कैमूर पहाड़ी पर बसे धनसा गांव की रहने वाली प्रियांशु जब रात को सोती थी तो डरी सहमी रहती थी कि कब नक्सली आ जायेंगे. और जब प्रियांशु के पिता कामता यादव पर 2006 में नक्सलियों द्वारा मौत का फरमान जारी हुआ तो, वह अपने बीबी बच्चे के साथ अकबरपुर में आकर शरण लिये. अपने दो बेटी व बेटा की पढ़ाई लिखाई करने के लिए अकबरपुर में ही रहने लगे.
श्री यादव की बेटी प्रियांशु 2014 में भारतीय संस्कृति विज्ञान परीक्षा में जिले में टाॅप की. वहीं 2015-2016 में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में छठी क्लास में जिला टॉपर की. इधर, प्रियांशु ने मुख्यमंत्री को दो पत्र लिखा, इसमें बिहार के तीव्र गति प्रगति के लिए प्रदेश के सभी जिलों में बारी-बारी से कैबिनेट बैठक कर सचिव स्तर का सदन चले और जिलों में ही जनता दरबार लगे.
इससे राज्य के 38 जिलों की समस्याओं को नजदीक से देखा जा सकेगा और समाधान भी हो सकेगा. दूसरे पत्र में प्रियांशु ने दिव्यांग बच्चों व बच्चियों के लिए हर जिला में अत्याधुनिक आवासीय विद्यालय खोलने का सुझाव दिया. इससे प्रदेश के हर जिलों के दिव्यांग बच्च व बच्चियां पांचवीं से इंटर तक पढ़ कर अपने देश के लिए कुछ कर सके.
