हत्या के तीन आरोपितों को आजीवन सश्रम कारावास

न्यायालय ने दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया नहीं देने पर काटनी होगी एक साल की अतिरिक्त सजा गोड्डा : जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय शिवपाल सिंह ने सोमवार को हत्या के एक मामले में तीन आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनायी. देवडांड थाना अंतर्गत गोविंदपुर के हीरा यादव, छतरलाल यादव व बालगोविंद यादव को […]

न्यायालय ने दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया

नहीं देने पर काटनी होगी एक साल की अतिरिक्त सजा
गोड्डा : जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय शिवपाल सिंह ने सोमवार को हत्या के एक मामले में तीन आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनायी. देवडांड थाना अंतर्गत गोविंदपुर के हीरा यादव, छतरलाल यादव व बालगोविंद यादव को दोषी पाकर आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी. न्यायालय ने सभी सजावार को दस हजार रुपये करके जुर्माना भी भरने का आदेश दिया है. जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक को एक वर्ष अतिरिक्त सजा काटनी होगी. गोविंदपुर के भीम यादव ने तीनों के विरुद्ध अपने पुत्र मोहन उर्फ भोरा यादव की हत्या को लेकर पोड़ैयाहाट थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. दर्ज प्राथमिकी संख्या 5/2006 के अनुसार 15 जनवरी 2016 को तीन बजे अपराह्न में हीरा यादव भीम यादव के घर आया तथा मोहन उर्फ भोरा को छुरी व तराजू देकर अगियामोड़ हटिया आने को कहा.
हटिया से जब मोहन वापस नहीं आया तो उसके पिता भीम यादव ने उसकी खोजबीन शुरू की. पता चला कि बाघमारा हटिया में हीरा यादव को खस्सी बनाने में भोरा सहयोग कर रहा था. कुछ लोगों ने तीनों के साथ भोरा व अन्य को जुआ खेलते भी देर रात तक देखा था. सुबह में ताल बहियार खंता के पास कीचड़ में भोरा यादव की लाश पायी गयी. भोरा यादव की मां व हीरा यादव की पत्नी के बीच कुछ दिन पूर्व झगड़ा हुआ था. जिसके कारण आरोपितों ने घटना को अंजाम दिया.
30 नवंबर-16 को समर्पित हुआ था आरोप पत्र
पुलिस अनुसंधान के बाद 30 नवंबर 2016 को तीनों के विरुद्ध भोरा उर्फ मोहन यादव की हत्या में शामिल होने का आरोप पत्र समर्पित किया. मामला सत्र न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण निम्न न्यायालय द्वारा मुकदमा को सत्र न्यायालय में भेजा गया. जहां यह सत्रवाद 22/2007 में तब्दील हुआ.16 अप्रैल 2007 को तीनों के विरुद्ध आरोप गठित किया गया. अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय में दिलाये गये 11 गवाहों की गवाही व उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने उक्त फैसला सुनाया. निर्णय की मुफ्त प्रति देते हुए तीनों को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया गया.
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