आजादी के पूर्व जमींदार चौहान राम ने अपने इलाके में अमन, चैन एवं खुशहाली के लिए ताराटांड़ में दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि जनहित में दुर्गा पूजा मनाने का सपना आने के बाद जमींदार चौहान राम ने ताराटांड़ में दुर्गा पूजा शुरू की थी. बाद में लोगों की सहमति से मंडप को गिरिडीह-टुंडी मुख्य सड़क के समीप भंडारीडीह हटिया मैदान में स्थापित किया गया. लोगों का मानना है कि इस मंदिर में जो कोई मनोकामना लेकर आते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है. कहा कि इस मंदिर में वैष्णवी रीति से पूजा की जाती है.
पूजा समिति है सक्रिय
दुर्गा पूजा समिति भंडारीडीह, ताराटांड़ के अध्यक्ष बिनोद राम ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी दुर्गा पूजा हर्षोल्लास के साथ मनायी जा रही है. कहा कि कलश स्थापना से संध्या छह बजे संगीतमय आरती होती है. यह लगातार नवमी तक चलेगा. चिहुंटिया, ताराटांड़, मोहलीडीह, भलपहरी, सोनबाद, बुचादह, नउयाडीहा, भंडारीडीह, कैलुडीह व झितरी के हजारों श्रद्धालु संध्या आरती में पहुंचते हैं. कहा कि भक्ति जागरण के साथ भलपहरी, ताराटांड़, चिहुंटिया तथा भंडारीडीह के नवयुवक चार दिन धार्मिक व सामाजिक नाटक का मंचन करते हैं.
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