मृतक की पत्नी बसंती देवी राज्यपाल संतोष गंगवार को पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने बताया कि उनके पति सऊदी अरब में हुंडई इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड में कार्यरत थे. उन्हें भारत से एशिया पावर ओवरसीज इंप्लॉयमेंट सर्विसेज चेंबूर मुंबई के माध्यम से विदेश भेजा गया था. परिजनों के अनुसार 23 अक्तूबर 2025 को सऊदी अरब में इलाज के दौरान विजय की मौत हो गयी. मौत से पहले उसने वॉयस संदेश में बताया था कि उसे पुलिस व अपराधियों के बीच गोलीबारी के गलती से उसे पुलिस की गोली लग गयी है. परिवार को संदेह है कि संबंधित कंपनी ने आपत्तिजनक व अवैध कार्य कराया जा रहा था, इसकी वजह से वे फायरिंग में घायल हुए और उनकी मौत हो गयी. परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद से अब तक ना तो मृतक का पार्थिव शरीर देश भेजा गया है और ना ही किसी प्रकार का बीमा अथवा मुआवजा दिया गया है.
संबंधित कंपनी को कई बार दिया आवेदन
इस घटना को तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है. इस दौरान मृतक की पत्नी ने एजेंसी और उसके प्रतिनिधि को कई बार आवेदन व सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराये, लेकिन कंपनी की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी.
विधायक जयराम महतो ने विधानसभा में उठाया है मामला
विधानसभा में यह मामला विधायक जयराम कुमार उठा चुके है. साथ ही गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी व विधायक द्वारा संबंधित प्रशासनिक कार्यालयों को पत्राचार भी किया है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. विजय अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य था. उसकी मौत के बाद पत्नी, दो छोटे बच्चे व बुजुर्ग माता-पिता पूरी तरह आश्रित हो गये हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है. बसंती देवी ने मांग की है कि एशिया पावर ओवरसीज इंप्लॉयमेंट सर्विसेज के सहायक प्रबंधक गोविंद सिंह के विरुद्ध लापरवाही के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाये. साथ ही मृतक का पार्थिव शरीर शीघ्र ही भारत लाया जाये और सभी देय मुआवजा राशि का भुगतान कंपनी करे.
