पीरटांड़ प्रखंड के बदगांव पंचायत के राजपुरा, अलकोको, बारहगडीह व मेरोमगोड़ा में सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में काफी दिक्कत होती है. कई बार मरीजों को चारपाई या खाट पर लादकर कच्चे रास्तों से मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है. कीचड़ और गड्ढों से भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से मरीजों की जान पर भी बन आती है. कई बार गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को गंभीर हालात में काफी मशक्कत के बाद सड़क तक लाया गया. बार-बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद जब सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने खुद ही श्रमदान और आपसी सहयोग से कच्ची सड़क बनाने का निर्णय लिया. रविवार को युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर फावड़ा, कुदाल और ट्रैक्टर की मदद से रास्ते को समतल करना शुरू कर दिया है. इसके लिए ग्रामीण आपस में चंदा भी इकट्ठा कर रहे हैं.
अभी तक मिला सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से कई बार सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ. उनका कहना है कि जब तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं होता, तब तक वे अपने स्तर से रास्ते को दुरुस्त करते रहेंगे. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाये, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में लोगों को परेशानी नहीं झेलनी पड़े. स्थानीय लोगों का मानना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में गांव का समुचित विकास संभव नहीं है. अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद प्रशासन कब तक संज्ञान लेकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाता है. मौके पर पंसस बिनोद किस्कू, पूर्व पंसस छोटकी देवी, वार्ड सदस्य सोनाराम टुडू, मांझी हड़ाम सुंदरराम हेंब्रम, नायकी हेंब्रम, नारायण हेंब्रम, प्रदीप हेंब्रम, पारसनाथ हेंब्रम, सुधीर टुडू, बुधन मुर्मू, पूर्व वार्ड सदस्य ललिता देवी, लीलो किस्कू, सुलामुनी देवी, बिरासमुनी देवी, रासमुनी देवी और सभी गांव के महिला-पुरुषों की भूमिका रही.
