वन कर्मी किसी तरह वहां से बगैर कोई काम किये वापस लौट गये और इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दी और विकास कार्य में बाधा डालने आदि को लेकर कानूनी कार्यवाई करने की बात कही. रेंजर अनिल कुमार ने कहा कि उक्त जमीन को लेकर हुए विवाद को खत्म करने के लिए गुमगी के ग्रामीणों का एक पांच सदस्यीय शिष्टमंडल बीते मंगलवार को डीएफओ से मिला. वे भी उस मीटिंग में थे, अच्छे वातावरण में बातें हुईं, शिष्टमंडल में जिप सदस्य रामकुमार राउत, मुखिया मो हासिमुदीन अंसारी, रामचरित यादव, सबदर अली और अमित साव शामिल थे. बातचीत के दौरान यह सहमति बनी कि उक्त जमीन पर फलदार वृक्ष लगाये जायेंगे, ताकि यहां के ग्रामीणों काे भी लाभ होगा. उन्होंने कहा कि जब सहमति बन गयी, तब इसके बाद हम वनकर्मियों के साथ उक्त स्थल पर ट्रेंच काटने पहुंचे. फिर ग्रामीणों का एक बड़ा झुंड जिसमें भारी संख्या में महिला पुरुष थे, सभी ने एक साथ पथराव करना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि हमलोग किसी तरह से काम छोड़कर वापस आ गये और फिर जान बची.
काम निश्चित रूप से होगा : रेंजर
रेंजर ने कहा कि अब काम तो जरूर होगा और विकास के कार्यों में बाधा डालने और पथराव करने के मामले में भी कानूनी कार्यवाई की जायेगी. इधर ग्रामीणों का कहना है कि कोई पथराव नहीं हुआ है. हमलोग वन विभाग द्वारा अपने खेतों में ट्रेंच काटने का विरोध कर रहे थे. ग्रामीणों का कहना है कि हमलोगों ने उक्त जमीन को लेकर उच्च न्यायालय में केस फाइल किया है और हम सभी चाहते हैं कि जब तक न्यायालय का निर्णय नहीं आ जाता तब तक वन विभाग द्वारा उक्त जमीन पर कोई काम नहीं किया जाये.
