विभाग का कहना है कि 42 पंचायतों वाले जमुआ प्रखंड के चिलगा पंचायत में उत्क्रमित मध्य विद्यालय कदमपुर में कोई पढ़नेवाला है ही नहीं. यही वजह है कि वर्ष 2020 में उक्त विद्यालय को दूसरे प्रखंड बेंगाबाद के प्राथमिक विद्यालय पारडीह में मर्ज कर दिया गया.
उत्क्रमित मध्य विद्यालय के शिक्षकों को अगल-बगल के स्कूल में प्रतिनियुक्ति कर दिया गया. इसके बाद से वीरान उक्त विद्यालय के सात कमराें पर ग्रामीणों ने कब्जा जमा लिया है.कोरोना काल में विद्यालय में बच्चों की कमी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग की ओर से उक्त विद्यालय को बंद कर बगल के विद्यालय पारडीह (बेंगाबाद) में मर्ज कर दिया गया. रुकसाना खातून, अनीस मिर्जा, मो. तौफीक, इशरत खातून, मो साहिल, सिवानी कुमारी आदि छात्रों ने बताया कि हमलोगों को एक किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ता है.
गांव में सुरक्षित विद्यालय भवन रहने के बावजूद दूसरे प्रखंड में पढ़ने को जाना पड़ता है. कहा कि हमलोगों के साथ विभाग ने सौतेलापन व्यवहार किया है.कब किया गया विद्यालय को मर्ज, इसका किसी के पास स्पष्ट जवाब नहीं
विद्यालय के पूर्व शिक्षक मो मुस्तकीम अंसारी ने कहा कि मेरी प्रतिनियुक्ति 2017 में बगल के विद्यालय महदाडीह में कर दी गयी है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय कदमपुर को विभाग द्वारा कब पारडीह में मर्ज कर दिया गया, इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है.इतनी जानकारी विभाग की तरफ से मिली है कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय में वर्ग 5 से 8 तक में छात्रों की संख्या पर्याप्त मात्रा में नहीं रहने की कारण उक्त विद्यालय को पारडीह में मर्ज किया गया है.
विद्यालय के दोनों शिक्षकों को अगल-बगल के विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति किया गया
यूएमएस कदमपुर विद्यालय के शिक्षक मो मुस्तकीम व मो साजिद यूएमएस चिलगा में प्रतिनियुक्त हैं. जबकि मो दाऊद सरकारी शिक्षक बन चुके हैं. प्रधानाध्यापक देवेंद्र वर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं
राज्य में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं : मुखिया
चिलगा की मुखिया सीमा कुमारी ने कहा कि सरकार एक तरफ ‘स्कूल चलें हम’ का नारा देती है तो दूसरी तरफ स्कूल को बंद कर देना कहां से उचित है. राज्य में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है. यहां के छात्र कम उम्र में ही रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य चले जाते हैं.शिक्षा विभाग ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों को बंद करने लगा है. ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का भविष्य क्या होगा, इससे यह अंदाजा भी लगाया जा सकता है. इससे बच्चे गलत राह पर जा सकते हैं. उन्होंने उपायुक्त, शिक्षा पदाधिकारी और शिक्षा मंत्री से इस विद्यालय को चालू कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने कर लिया है कब्जा
स्कूल को पांच वर्ष से बंद पड़ा देख स्थानीय ग्रामीणों ने वहां बिचाली, लकड़ी और मवेशियों को रखना चालू कर दिया है. ग्रामीण बताते हैं कि स्कूल में कोई आता जाता ही नहीं और न ही बच्चे पढ़ने आते हैं, इसलिए वे इसमें मवेशी रखते हैं. विभाग जब कहेगा उसे वहां से हटा लेंगे
क्या कहते हैं बीइइओ
जमुआ के प्रभारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी तीतूलाल मंडल ने कहा कि मुझे जमुआ में बीइइओ बने एक पखवाड़ा हुआ है. बगैर मर्ज किये विद्यालय बंद नहीं हो सकता है. किस कारण उत्क्रमित मध्य विद्यालय कदमपुर काे मर्ज किया गया है, इसकी जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.2017-18 में जिले से एक पत्र जारी हुआ था कि जिस विद्यालय में 30 स कम बच्चे उपस्थित हो रहे हैं, उस विद्यालय को नजदीक के स्कूल में मर्ज कर दिया जाएगा. अभी भी एक सर्वे किया जा रहा है, जहां 30 से कम बच्चों की उपस्थिति हो रही है. जल्द ही एक रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजी जायेगी.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
