गिरफ्तार आरोपितों में गांडेय थाना क्षेत्र के भंडारकुंडा निवासी शब्बीर अंसारी का 20 वर्षीय पुत्र शाहीद अफरीदी तथा उस्मान अंसारी का 19 वर्षीय पुत्र मो शमशाद अंसारी शामिल हैं. दोनों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. सोमवार को साइबर थाना प्रभारी रामेश्वर भगत ने अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एसपी डॉ विमल कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ साइबर अपराधी गांडेय थाना क्षेत्र के तेलखारी जंगल में बैठकर ठगी कर रहे हैं. सूचना की पुष्टि के बाद उनके नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. टीम चिह्नित स्थल पर पहुंची, तो आरोपित इधर-उधर भागने लगे. पुलिस टीम ने चारों ओर से घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया. साइबर थाना में लाकर दोनों से पूछताछ की गयी, इसमें उन्होंने अपने-अपने अपराध स्वीकार किया.
अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुकिंग के नाम पर करते थे ठगी
रोपितों ने पूछताछ में बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से नामी-गिरामी अस्पतालों के अपॉइंटमेंट बुकिंग से संबंधित फर्जी पैड/लिस्टिंग बनाते थे. इन फर्जी लिस्टिंग में अस्पताल के वास्तविक संपर्क नंबर के स्थान पर अपना फर्जी मोबाइल नंबर दर्ज कर देते थे. इसके बाद जब कोई मरीज या उनके परिजन डॉक्टर से अपॉइंटमेंट कराने के लिए दिये गये नंबर पर कॉल करते थे, तो आरोपित खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताकर लोगों को झांसे में ले लेते थे. भरोसा जीतने के बाद वे अपॉइंटमेंट बुकिंग के नाम पर पीड़ितों के मोबाइल नंबर पर एक फर्जी एपीके फाइल भेजते थे. जैसे ही पीड़ित उक्त फर्जी एपीके फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता था, वैसे ही उसके मोबाइल की निजी जानकारी तक अभियुक्तों की पहुंच हो जाती थी और इसके बाद बैंक खाते से अवैध निकासी अथवा अन्य प्रकार की साइबर ठगी दोनों करते थे. पूरे मामले को लेकर साइबर थाना में कांड (संख्या 07/26) दर्ज किया गया है.
छापेमारी में मोबाइल व सिम कार्ड बरामद, एक का आपराधिक इतिहास
छापेमारी के दौरान गिरफ्तार आरोपितों के पास से साइबर ठगी में प्रयुक्त कई सामान बरामद किए गए हैं. पुलिस के अनुसार आरोपितों के पास से चार व छह सिम कार्ड मिले हैं. इनका उपयोग वे साइबर ठगी के लिए करते थे. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार मो शमशाद अंसारी का आपराधिक इतिहास रहा है. वह पूर्व में भी साइबर ठगी के एक मामले में गिरिडीह साइबर थाना कांड संख्या 37/23 के तहत जेल जा चुका है. साइबर पुलिस बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके माध्यम से अब तक कितने लोगों से ठगी की गयी है. गिरोह में शामिल अन्य लोगों का भी पता लगाया जा रहा है.
