आदिवासी समाज के लोग पहले झंडा मैदान में एकजुट हुए. उसके बाद रैली निकाली गयी, जो शहरी क्षेत्र के विभिन्न चौक चौराहों का भ्रमण करते हुए वापस झंडा मैदान पहुंची. बताया गया कि सूर्या हांसदा एक प्रतिष्ठित आदिवासी नेता और शिक्षाविद थे, जिन्होंने गिरिडीह क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए अथक प्रयास किया था. हाल ही में वे एक विवादास्पद एनकाउंटर में मारे गये. यह घटना न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर देनेवाली है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज में आक्रोश पैदा कर रही है. हांसदा द्वारा संचालित विद्यालय ने सैकड़ों अनाथ और गरीब आदिवासी बच्चों को शिक्षा मिल रही थी, अन्यथा वे इससे वंचित रह जाते. उनकी मृत्यु के बाद समुदाय ने महसूस किया कि यह केवल एक व्यक्ति की हानि नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी संघर्ष की हानि है.
पुलिसिया जांच में पक्षपात की आशंका जतायी
आदिवासी छात्र संघ गिरिडीह के अध्यक्ष प्रदीप सोरेन ने कहा कि सूर्या हांसदा हमारे समाज के एक मजबूत स्तंभ थे. उनके एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच आवश्यक है, क्योंकि स्थानीय जांच में पक्षपात की आशंका है. हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि न्याय की जीत हो सके. साथ ही कुड़मी-कुर्मी के द्वारा एसटी सूची में शामिल करने की मांग का विरोध भी करते हैं. मौके पर सचिव मदन हेंब्रम, मीडिया प्रभारी रमेश मुर्मू, कोषाध्यक्ष चांद सोरेन, प्रदीप सोरेन, सोना लाल, रमेश मुर्मू, भोला राम, रेणु हांसदा, किरण टुडू, अक्षय मुर्मू, सचिन मुर्मू, समीर मुर्मू, श्यामसुंदर हांसदा, प्रवीण मुर्मू, हिंगामुनि मुर्मू, दशरथ किस्कू, नुनूलाल मरांडी, किशोर मुर्मू, दिमोल मरांडी समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
