टोल में वाहनों से टैक्स की वसूली नहीं होने से एनएचआई का भुगतान बाधित हो गया है. ऐसे में संवेदक के सिक्युरिटी मनी से कटौती शुरू हो यीई है. यही स्थिति रही तो एनएचआई संबंधित संवेदक के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने को बाध्य होगा. इधर, टोल कर्मियों को मानदेय नहीं मिलने से लगभग दो दर्जन कर्मियों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. बताया जाता है कि नावासारी टोल प्लाजा में तीन पाली में लगभग दो दर्जन कर्मी कार्यरत थे. टोल के संवेदक मनीष मैनपावर एजेंसी अपने अधीन कर्मियों को प्रतिमाह मानदेय भुगतान करते थे. लेकिन पिछले तीन से चार माह से एजेंसी के कर्मी मानदेय भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं.
पूर्व में भी किया था कार्य बहिष्कार
पूर्व में भी मानदेय को लेकर कर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया था. एजेंसी के अधिकारियों ने अपने पैरवी व पहुंच के बल पर कर्मियों को भरोसे में लेकर कार्य कराया और शीघ्र मानदेय भुगतान का भरोसा दिया. भरोसे में आकर कर्मियों ने टोल वसूली का कार्य किया, लेकिन एजेंसी की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ. विवश होकर कर्मियों ने कार्य को छोड़ दिया. इसके कारण यहां से आने जाने वाले वाहनों से वसूली पूरी तरह से बंद हो गयी है. कर्मी के नहीं रहने के कारण टोल पर वीरानी छा गयी है. वाहन चालक आराम से बिना टैक्स टोल पार कर रहे हैं. हालांकि, जिन वाहनों में फास्ट टैग लगा हुआ है, उससे टैक्स की कटौती हो रही है, लेकिन ऑफलाइन वसूली बंद हो गयी है. इससे एनएचआई को साप्ताहिक भुगतान नहीं हो पा रहा है. टोल के कर्मियों का कहना है कि मानदेय की मांग करने पर एजेंसी की ओर से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. ऐसे में उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है और घर परिवार की जवाबदेही में फजीहत हो रही है.
क्या कहते हैं एनचएसआई की सीनियर इंजीनियर
इधर, एनएचएआई के सीनियर इंजीनियर आशीष सिंह का कहना है कि किसी भी सूरत में कर्मियों को मानदेय का भुगतान कराया जायेगा. मानदेय नहीं देना कहीं से उचित नहीं है. कहा कि संवेदक एनएचएआई को भी साप्ताहिक भुगतान नहीं कर रहा है. बार-बार मौका देने के बाद भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं लाया जा रहा है. अब कड़ा स्टेप उठाने की विवशता बन गयी है.
