Giridih News :युवाओं में अब पहले जैसे अब नहीं दिखता पतंगबाजी का जुनून

Giridih News :मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजी करने का जो जुनून पहले देखने को मिलता था, अब वह देखने को नहीं मिल रहा है.

पहले लोग मकर संक्रांति के आने से पूर्व ही पतंग के अलावा लटाई और धागे खरीदने लगते थे, ताकि सही समय पर पतंगबाजी की जा सके. इतना ही नहीं लोग अपने अपने घरों की छत पर खड़े होकर जहां पतंग उड़ाते थे, तो वहीं एक दूसरे की पतंग काटने के प्रयास में लगे रहते थे, इसके लिए सारे जुगाड़ वे पहले से ही तैयार रखते थे. पतंग उड़ानेवाल लटाई में लगे धागे को शीशे के चूर्ण आदि से मांझा कर मजबूत बना लेते थे. इससे पतंगों को काटने में काफी सहायता मिलती थी. इसे लेकर कई कमिटियों की ओर से पतंगबाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता था, जिसमें लोग बढ़-चढ़कर भाग भी लेते थे. विजयी प्रतिभागियों को उक्त कमिटी की ओर से पुरस्कृत भी किया जाता था. अब पतंगबाजी करनेवाले ऐसे युवकों का उत्साह अब ठंडा पड़ गया है. ऐसे में अब युवा वर्ग के लोग या फिर बच्चे मैदान में जमा होकर पतंगबाजी करने को मजबूर हैं.

गिरिडीह शहर और आसपास उत्साह देखने को मिला

सुबह पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान-दान के बाद लोगों का हुजूम मैदानों में उमड़ पड़ा. देखते ही देखते शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सतरंगी हो गया. शहर के बड़ा चौक, मकतपुर, पचंबा और शास्त्री नगर जैसे इलाकों के मैदानी क्षेत्र में सुबह से ही काटो-काटों और वो काटा का शोर सुनाई देने लगा. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई पतंगबाजी के इस पारंपरिक खेल में मशगूल नजर आया.

सावधानी का संदेश

जिला प्रशासन और स्थानीय जागरूक नागरिकों ने इस दौरान चाइनीज मांझे का उपयोग न करने की अपील की है, ताकि पक्षियों और राहगीरों को कोई नुकसान न पहुंचे.

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Author: PRADEEP KUMAR

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