अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका देवी प्रतिभा ने कहा कि सनातन संस्कृति की मूल भावना प्रेम, अहिंसा और प्राणी मात्र के सम्मान में निहित है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में पारिवारिक संस्कारों और परंपराओं को कमजोर नहीं होने देना चाहिए. आपसी एकजुटता ही सामूहिक शक्ति का आधार है.
समाज को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ होना होगा
विहिप गुवाहाटी केंद्र के बिरेंद्र विमल ने कहा कि सनातन पर गर्व करते हुए समाज को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनाना होगा. महंत स्वामी चैतन्य ब्रह्मचारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया. कहा कि यह समाज के लिए गर्व का विषय है. इतिहास में अनेक चुनौतियों के बावजूद सनातन परंपरा कायम रही है. गौ संरक्षण, धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी उन्होंने जागरूकता की आवश्यकता बतायी. संघ के झारखंड प्रांत प्रचारक गोपाल जी ने कहा कि सदियों की चुनौतियों के बाद भी हिंदू समाज अपनी परंपराओं के साथ खड़ा है. उन्होंने घर-घर धार्मिक परंपराओं, त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने की बात कही.
जात-पात से ऊपर उठने की अपील
गोपाल जी ने जात-पात से ऊपर उठकर एक पंक्ति में भोजन और सामाजिक समरसता को सनातन की पहचान बताया. स्वदेशी अपनाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने पर भी बल दिया गया. सम्मेलन में वक्ताओं ने राम मंदिर निर्माण के संदर्भ में समाज के संघर्ष और एकजुटता का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता जतायी.
