साड़ी निर्माण सीख आत्मनिर्भर बनेंगी जमुआ की 30 ग्रामीण महिलाएं

जमुआ प्रखंड में 30 ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू हो गई है. 20 दिवसीय प्रशिक्षण में महिलाओं को साड़ी निर्माण की बारीकियां सिखाई जाएंगी, जिससे वे घर बैठे आय अर्जित कर सकें.

महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उन्हें आजीविका के नये अवसरों से जोड़ने की दिशा में बुधवार को जमुआ प्रखंड की बेरहाबाद पंचायत में पहल शुरू हुई. नाबार्ड के सौजन्य से आइडिया (इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंपावरमेंट एंड अवेयरनेस) संस्था द्वारा प्रायोजित 20 दिवसीय स्वावलंबी साड़ी संगम परियोजना के तहत साड़ी निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया. प्रशिक्षण शिविर दो सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा. प्रथम चरण में पंचायत की 30 महिलाओं का चयन किया गया है, जिन्हें साड़ी निर्माण के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं के साथ उत्पाद की बिक्री और विपणन की जानकारी भी दी जाएगी.

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि गिरिडीह के एलडीएम अमृत चौधरी, विशिष्ट अतिथि नाबार्ड के डीडीएम सीवी हरिहरण, बेरहाबाद पंचायत की मुखिया सोनी देवी, प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर खुशी शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अनवर हादी और पूर्व पंचायत समिति सदस्य हीरा देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

घर बैठे आय बढ़ाने पर दिया जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एलडीएम अमृत चौधरी ने प्रशिक्षणार्थी महिलाओं से पूरी लगन, मेहनत और समर्पण के साथ प्रशिक्षण लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गयी तकनीकों का इस्तेमाल कर महिलाएं घर बैठे आय का साधन विकसित कर सकती हैं. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक नींव को भी मजबूती मिलेगी.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को कौशल से जोड़ने वाली ऐसी पहल आत्मनिर्भरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने की अपील

नाबार्ड के डीडीएम सीवी हरिहरण ने कहा कि स्वावलंबी साड़ी संगम परियोजना ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक कौशल से जोड़ते हुए आजीविका के नये अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से साड़ी निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि तैयार उत्पाद बाजार की मांग के अनुरूप हो और महिलाओं को बेहतर आय मिल सके.

मुखिया सोनी देवी ने कहा कि साड़ी निर्माण का हुनर सीखकर पंचायत की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकती हैं. उन्होंने महिलाओं से प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने की अपील की.

तकनीक से लेकर विपणन तक का प्रशिक्षण

प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर खुशी शर्मा ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और उद्यमिता से जोड़ना है. प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को स्वयं का कुटीर उद्योग शुरू करने और आय का स्थायी साधन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

बिहार के भागलपुर से पहुंचे मास्टर ट्रेनर विश्वनाथ शाह प्रशिक्षणार्थियों को साड़ी निर्माण की तकनीकी, व्यावहारिक और विपणन संबंधी बारीकियां सिखाएंगे. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण साड़ी तैयार करने के साथ बाजार की जरूरतों और उत्पाद के विपणन की जानकारी भी दी जाएगी.

कार्यक्रम में सीआरपीएफ हसीना खातून, जाशरीन खातून, अनीता यादव, कंचन देवी, बबीता देवी, गुड़िया देवी, कुसुम देवी, चंपा देवी, नीलम कुमारी, आशा देवी, ललिता देवी और हेमंती देवी समेत चयनित सभी 30 प्रशिक्षणार्थी महिलाएं मौजूद रहीं. महिलाओं ने प्रशिक्षण को लेकर उत्साह जताते हुए इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में उपयोगी अवसर बताया.

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By Sunil verma

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