आउटसोर्सिंग कर्मियों को समय पर वेतन भुगतान समय पर मिल रहा है या नहीं, इपीएफ व पीएफ की राशि संबंधित कर्मियों के अकाउंट में भेजा जा रहा है या नहीं, इसकी भी आयोग ने रिपोर्ट मांगी है. उक्त बातें उन्होंने रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. श्री वर्मा ने कहा कि पिछले दिनों आयोग के अध्यक्ष के साथ उन्होंने विभिन्न जिलों का दौरा किया था. 13 सितंबर को गिरिडीह जिला प्रशासन के साथ बैठक हुई थी. इस बैठक में वेतनादि से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया था, लेकिन रिपोर्ट भेजने में देरी की जा रही है.
रिपोर्ट भेजने में देरी को आयोग ने गंभीरता से लिया
रिपोर्ट भेजने में देरी को आयोग ने काफी गंभीरता से लिया है. संबंधित विभागों को एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है. कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में अधिक कर्मियों को लिया गया है. इस संदर्भ में गिरिडीह के सिविल सर्जन से आयोग द्वारा एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गयी है. कहा कि अपनी मांगों को लेकर यहां पर कार्यरत कर्मी कई बार धरना दिया. पिछड़ा वर्ग से लिए गये कर्मचारी को अगर आउटसोर्सिंग कंपनी मनमाने ढंग से हटाती है और इसकी शिकायत आयोग में आती है, तो उसकी भी सुनवाई की जायेगी. कहा कि गिरिडीह सहित साहेबगंज, पाकुड़, धनबाद व जमशेदपुर जिला प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गयी है. राज्य सरकार नियमानुसार कंपनी को भुगतान करती है, लेकिन कंपनी कर्मियों को पैसे देने में आनाकानी करती है. इससे सरकार की बदनामी होती है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
