बता दें कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग आते हैं. रेफर होने पर उनका सहारा 108 एंबुलेंस होती हैं. यह सेवा निःशुल्क होने के कारण मरीजों के लिए जीवनदायिनी है, लेकिन हड़ताल के कारण सेवा बंद होने से रेफर मरीजों को परेशानी हो रही है. गरीब मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
2500 रुपये किराया देकर प्राइवेट एंबुलेंस बुलाना पड़ा
सदर अस्पताल में अपनी पत्नी का इलाज करवाने के लिए आये मुकेश साव ने बताया कि डॉक्टरों ने उसकी पत्नी को बेहतर इलाज के लिए दूसरे जिला रेफर किया, लेकिन 108 एंबुलेंस सेवा बंद होने के कारण उसे 2500 रुपये किराया देकर प्राइवेट एंबुलेंस बुलानी पड़ी. कहा कि निजी एंबुलेंस चालक मनमानी भाड़ा वसूलते हैं. उसने विभाग से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है.
क्या कहते हैं एंबुलेंस कर्मी
हड़ताल के दूरसे दिन शनिवार को एंबुलेंस कर्मी बबलू तांती, मनोज वर्मा, मजहर अंसारी, मुकेश रजक, सुरेश पांडेय, प्रमिला सोरेन, पुष्पलता सोरेन, रंजीत वर्मा, महेश कुमार, राहुल यादव, विकास वर्मा, संतोष कुमार, गोविंद कुमार, पंकज कुमार आदि ने कहा कि वह लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो रही है. सरकार व प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कर्मियों का आरोप है कि वह दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है. कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी तब तक वह हड़ताल पर रहेंगे.
अलग से की गयी है एंबुलेंस की व्यवस्था : सिविल सर्जन
इधर गिरिडीह जिला के सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा ने बताया कि 108 एंबुलेंस कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच मरीजों की परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को इसकी सुविधा मिलेगी, ताकि आपात स्थिति में किसी को परेशानी ना हो. उन्होंने कहा आवश्यकतानुसार तत्काल एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करायी जा रही है.
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